For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल: कोई समझाए माजरा क्या है

2122 1212 22

कोई समझाए माजरा क्या है

तीरगी क्या है यूँ कि रा क्या है

मिटना हर शय का तो मुअय्यन है

ज़िंदगानी में निर्झरा क्या है

इक समंदर के जैसे लगती हैं

नम सी आँखों में दिल भरा क्या है

टूट कर ख़्वाब गिरते रहते हैं

आँख में आईना सरा क्या है

देख कर उनको आरज़ू करना

दिल की हसरत का दिलबरा क्या है

इश्क़ में रूह गर जो महके, तो

मुश्क़ फ़िर क्या है मोगरा क्या है

चाहतें भी हों दायरों में अगर

ऐसी बातों का फ़िर सिरा क्या है

प्यार करना हो गर ख़ता कोई

आख़िर इस पर भी मशविरा क्या है

साथ देती न ज़िंदगी ख़ुद की

फ़िर किसी का भी आसरा क्या है

सर उठाना हो गर गुनाह कोई

फ़िर न पूछो कि दिल डरा क्या है

हो अगर लाज़िमी सवाल-ए-शिकम

फ़िर भला क्या है और बुरा क्या है

मौत बन जाए ज़िंदगी गर जो

फ़िर परी क्या है अप्सरा क्या है

लोग आते हैं बस नमक लेकर

पूछने हाल अब मिरा क्या है

चैन से मरने भी नहीं देते

दिल दुखाने का दायरा क्या है

इक महज़ क़ब्रगाह ताजमहल

देख ली शान-ए-आगरा क्या है

ज़ख़्म ही ज़ख़्म हैं "तमाम आज़ी"

और इसके सिवा हरा क्या है

(मौलिक व अप्रकाशित) 

आज़ी तमाम

रा          : संस्कृत में प्रकाशमान/ मिस्र में सूर्य का देवता

निर्झरा   : अजर अमर

मुअय्यन : निश्चित

Views: 604

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Aazi Tamaam on April 2, 2021 at 10:30am

सादर प्रणाम आदरणीय ब्रज जी 

हौसला अफ़ज़ाई व मार्गदर्शन के लिए सहृदय धन्यवाद

जी ग़ज़ल अभी अधूरी भी है और गड़बड़ भी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 1, 2021 at 8:25pm

भाई आज़ी तमाम जी बढ़िया कहा...लेकिन मतले का सानी समझ नही आ रहा...ऐसे देखें

नम सी आँखों का फ़लसफ़ा क्या है

कोई समझाए माजरा क्या है

Comment by Aazi Tamaam on March 27, 2021 at 8:30pm
सादर प्रणाम आदरणीय अमीर जी

शुक्रिया ग़ज़ल तक आने व मार्गदर्शन कर ग़ज़ल दुरुस्त कराने का प्रयास करने के लिये

एक बार कबीर गुरु जी और नज़र डाल दें ग़ज़ल पे फ़िर एक ही बार में एडिट करके पोस्ट कर दूंगा

इस्लाह के लिये सहृदय धन्यवाद
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on March 27, 2021 at 7:40pm

जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, मुबारकबाद पेश करता हूँ।

'कोई समझाए माज़रा क्या है'   इस मिसरे में 'माज़रा' से नुक़्ता हटा लीजिए, सही लफ़्ज़ 'माजरा' है।

'देख कर उनको आरज़ू करना

दिल की हसरत का दिलवरा क्या है'  इस शे'र के मिसरों में रब्त नहीं है, रब्त के लिए 'उनको' को तुमको करना उचित होगा, 'दिलवरा' को दिलबरा कर लें।

'बिन सनम साँस तक नहीं आती

मुश्क़ फ़िर क्या है मोगरा क्या है'       इस शे'र के मिसरों में रब्त नहीं है,  ऊला बदलने का प्रयास करें। 

'ऐसी बातों का फ़िर सिरा क्या है'      यहाँ क़ाफ़िया बदल गया है।

'आख़िर इस पर भी मशवरा क्या है'  सही लफ़्ज़ मशविरा होने की वज्ह से यहाँ भी क़ाफ़िया बदल गया है। 

'हो अगर लाज़िमी सबाल ए शिकम   टंकण त्रुटि ठीक कर लें 'सवाल' 

'फ़िर भला क्या है और बुरा क्या है'   यहाँ भी क़ाफ़िया बदल गया है।   ग़ौरकीजियेगा।  सादर। 

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service