For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

निर्भरता(लघुकथा)

मलाई की मिठाई बेचते बेचते मंगनी हलवाई का नाम चल निकला था।वह दूधवालों से खास मौकों पर दूध लेता।मिठाई बनाता।बेचता। बानगी के तौर थोड़ा थोड़ा दूध देनेवालों को चखने भर दे देता। वाह वाह होती।क्या खूब मिठाई बनाता है अपुन का मंगनी,ऐसा सब कहते फिरते।मंगनी की शोहरत बढ़ती।मिठाई की मांग में इजाफा होता।वह मालामाल होता।
आज फिर उसने दूधवालों से दूध पहुंचाने की अपील कर डाली।शर्तें हैं कि हर दूधवाला खुद उसके यहां दूध पहुंचाए।पेठवना नहीं चलेगा। और हां,अब जो मिठाई बनेगी उसे दूध देने वाले भी खरीदेंगे।पहले की तरह बानगी बांटने की रस्म मुकम्मल समझें।
किसी बुजुर्ग दूधवाले ने अर्ज की कि दूध तो हम मुफ्त में दे ही रहे हैं।मंगा लो बाबा। चाहे किसी के हाथ भेजने(पेठाने) की छूट दो।इस पर मंगनी भड़क गया।उसने ऐलान ठोक दिया कि जिसे दूध पहुंचाना हो,पहुंचाए। न पहुंचाना हो, न पहुंचाए। मैं तो मंगाने या पेठवने से दूध लेने से रहा। मेरे पास पहले से ही ढेर सारा दूध है।उसीकी मिठाई बना दूंगा। बिक जायेगी।मंगनी की मिठाई हैं न।
मेरी आंख खुली।सामने ढेर सारे दूधवाले खड़े थे।उनमें मुझे विभिन्न लघुकथाकारों के अक्स नजर आए।मुझे गुस्सा आया।चेहरा तमतमाया। मैं बस बोलनेवाला ही था कि एक मद्धिम -सी जनाना आवाज मेरे कर्ण -पटल से टकराई।
'रहने दो।'उसने कहा।
'आप कौन हैं देवि?'मैने पूछा।
'लघुकथा हूं मैं। अब तक ऐसी ही हूं।'
मेरा मुंह खुला ही रह गया।

'मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 497

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on September 10, 2021 at 10:20pm

आभार आ. चेतन जी।

Comment by Manan Kumar singh on September 10, 2021 at 10:19pm

आभार आ. समर जी।

Comment by Chetan Prakash on September 10, 2021 at 1:14pm

नमस्कार, मनन कुमार सिंह, एक अच्छी सुगठित लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें! बात कुछ ज्यादा गहरी किन्तु वास्तविकता है! विकास यात्रा निश्चित रूप से उर्ध्वगामी है! आनंद का विषय है.... 

Comment by Samar kabeer on September 7, 2021 at 6:03pm

जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, लघुकथा का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service