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जय भारत के लोगों की 

जय भारत देश महान की 

जय जय जय गणतंत्र दिवस की

जय जय संविधान की

जय जय जय जय हिंद

अपनी धुनें बनाई हमने अपना राग बनाया था 

जिसमें समता, न्याय, आजादी का संकल्प समाया था 

एक अखंडित राष्ट्र के लिए गरिमा भाईचारा से 

हमने अपने गीत लिखे थे हमने खुद को गाया था 

जय लिक्खी संप्रभुता की जय लोकतंत्र कल्याण की 

जय जय जय गणतंत्र दिवस की

जय जय संविधान की

जय जय जय जय हिंद 

सूत कातते वंदे मातरम जन-गण-मन ने गाया था

नेक विचारों के करघे ने सुंदर वस्त्र बनाया था 

हीरों जैसे अनुच्छेद मोती सी अनुसूचियाँ जड़ित 

स्वतंत्रता दुल्हन को हमने संविधान पहनाया था 

चारों तरफ रोशनी फैली संविधान परिधान की 

जय जय जय गणतंत्र दिवस की

जय जय संविधान की

जय जय जय जय हिंद

आशीष आशीष

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 12, 2022 at 11:22am

जय हो जय हो..क्या सुंदर सृजन है...बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 2, 2022 at 8:25pm

आ. भाई आशीष जी, अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 26, 2022 at 11:23am

जय जय जय गणतंत्र दिवस की

जय जय संविधान की

जय जय जय जय हिंद             जनाब आशीष यादव जी आदाब, सुंदर भावों से सुसज्जित रचना एवं गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाईयाँ।  सादर।

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