For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इतना बंदी मत करो मुझे अहसानों से....

इतना बंदी  मत करो मुझे अहसानों से,

कि आखिर को प्रतिदान नहीं मैं दे पाऊँ.

 

विस्मृत अस्तित्व होगया जब मुझसे मेरा,

अहसान तेरे सदियों  के कैसे  याद रहें.

जलने दो जो जलती मुस्कानों की होली,

इतने आंसू मत गिरो, नहीं मैं चुन पाऊँ.

 

किस किस उपवन के अंचल को दोगी वसंत, 

हर उपवन में पतझड़ का शाश्वत शासन है.

आकर्षित मुझको करो न दीपक से क्योंकि

शायद  प्रकाश के  बदले  निशा न  दे पाऊँ.

 

इस क्षणिक मिलन से अभिप्रेत है चिर वियोग,

इस चिर  अभाव में  चिर  तृप्ति का साधन है.

रहने  दो  उर में  आस  अधूरी  मिलने  की,

अमरत्व मिलन के बाद न स्वीकृत कर पाऊँ.

 

इतना  बंदी मत करो  मुझे अहसानों से,

कि आखिर को प्रतिदान नहीं मैं दे पाऊँ.

Views: 524

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Kailash C Sharma on September 6, 2011 at 1:51pm

आभार अरुण जी....

Comment by Abhinav Arun on September 5, 2011 at 8:47pm
ह्रदय के मधुर भाव बेहतरीन तरीके से इस रचना में प्रवाहित है कैलाश जी बधाई इस कविता हेतु !!
Comment by Kailash C Sharma on September 5, 2011 at 8:19pm

गणेश जी और सौरभ जी, रचना पसन्द करने और प्रोत्साहन के लिए आभार। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 4, 2011 at 5:11pm

इस क्षणिक मिलन से अभिप्रेत है चिर वियोग,

इस चिर  अभाव में  चिर  तृप्ति का साधन है.

रहने  दो  उर में  आस  अधूरी  मिलने  की,

अमरत्व मिलन के बाद न स्वीकृत कर पाऊँ.

 

वाह वाह, बहुत ही खुबसूरत रचना, कैलाश जी बधाई स्वीकार करे इस सारगर्भित अभिव्यक्ति पर |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 4, 2011 at 10:34am

//इस क्षणिक मिलन से अभिप्रेत है चिर वियोग,

इस चिर अभाव में चिर तृप्ति का साधन है.

रहने दो उर में आस अधूरी मिलने की,

अमरत्व मिलन के बाद न स्वीकृत कर पाऊँ.//

पंक्तियाँ सहज ही आकर्षित करती हैं.

इस भाव-प्रवण रचना पर बधाई.

 

Comment by Kailash C Sharma on September 3, 2011 at 7:50pm

शुक्रिया अरुण जी..

Comment by Abhinav Arun on September 3, 2011 at 3:08pm
ह्रदय की गहराई से निकली काव्य पंक्तियाँ अपना गहरा असर छोडती हैं | इस भाव प्रधान रचना के लिए हार्दिक बधाई कैलाश जी !!
Comment by Kailash C Sharma on September 3, 2011 at 3:04pm

शुक्रिया आशीष जी..

Comment by आशीष यादव on September 3, 2011 at 1:29pm

रहने  दो  उर में  आस  अधूरी  मिलने  की,

अमरत्व मिलन के बाद न स्वीकृत कर पाऊँ.

सुन्दर रचना के लिए बधाई,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
52 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service