For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तिरंगे को सम्मान

माना की तुम भूल गए हो ,
दिलों दिमाग से खुल गए हो |
वो भी कुछ कम नहीं थे ,
पर दिमाग में उनके बल नहीं थे
तीन रंग उनकी कमजोरी थी ,
खेली खून की होली थी |
वो कहते ये चिर है माँ का ,
शहीद हुए जो धीर थे माँ का ,
जिसके लिए वो जान गवां दी
अपनी माँ की वस्त्र बचा दी
इसको थोड़ी पहचान दो ,बेटे
तीन रंग को सम्मान दो ,बेटे !!
.....रीतेश सिंह

Views: 225

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ritesh singh on August 19, 2010 at 11:45pm
मनोज जी ,नीलम जी ,राणाप्रताप जी आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद ..
Comment by ritesh singh on August 19, 2010 at 11:43pm
बहुत बहुत धन्यवाद admin.ji..
Comment by ritesh singh on August 19, 2010 at 11:42pm
बहुत बहुत धन्यवाद गणेश जी ..
आपको मेरी ओपन बुक्स की पहली रचना पसंद करने के लिए ..
Comment by Neelam Upadhyaya on August 16, 2010 at 2:29pm
तीन रंग उनकी कमजोरी थी ,
खेली खून की होली थी |
वो कहते ये चिर है माँ का ,
शहीद हुए जो धीर थे माँ का ,

बहुत ही सुन्दर रचना है ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 15, 2010 at 7:33pm
सुन्दर रचना..सुन्दर सन्देश.....स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व की ढेरो शुभकामनाये|
Comment by Admin on August 15, 2010 at 12:30pm
आदरणीय रितेश सिंह जी, प्रणाम,
सर्वप्रथम स्वतंत्रता दिवस की बधाई स्वीकार करे, ओपन बुक्स ऑनलाइन के मंच पर आपके पहली रचना का ह्रदय से स्वागत है, अच्छी रचना प्रस्तुत की है आपने, आगे भी आपकी रचनाओं का इन्तजार रहेगा, इसी तरह मोहब्बत बनाये रखे, धन्यवाद,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 15, 2010 at 10:16am
इसको थोड़ी पहचान दो ,बेटे
तीन रंग को सम्मान दो ,बेटे !!
वाह रितेश जी वाह, जबरदस्त रचना दी है आपने, मेरे ख्याल से यह ओपन बुक्स ऑनलाइन पर आपकी पहली रचना है, पहले ही आगाज मे आप ने अपनी कलम की तीखी धर दिखा दी है, सुंदर और ससक्त अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता दिवस की और इस सुंदर रचना पर बधाई स्वीकार करे,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 121

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ इक्कीसवाँ आयोजन है.…See More
5 minutes ago
Sachidanand Singh joined Admin's group
Thumbnail

हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
4 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

पावन छंद "सावन छटा"

(पावन छंद)सावन जब उमड़े, धरणी हरित है। वारिद बरसत है, उफने सरित है।। चातक नभ तकते, खग आस युत हैं।…See More
4 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ विनय जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहब"
8 hours ago
विनय कुमार posted blog posts
yesterday
Sachidanand Singh is now a member of Open Books Online
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विनय जी, अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"आ. भाई विनय जी, सादर अभिवादन । प्रासंगिक व सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
विनय कुमार commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"बेहद खूबसूरत और बेहतरीन नगमा, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ अज़ीज़ तमाम साहब"
yesterday
विनय कुमार commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बेहद खूबसूरत और बेहतरीन गजल, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ लक्ष्मण धामी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई गुरप्रीत जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थित, सराहना व सुझाव के लिए हार्दिक…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service