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ऐसा शहर

 ठिठुरती जिन्दगी

सड़कों पर

 

तार-तार है

नज़र अ़दाजी से

इंसानियत

 

जमती साँस

बच पाती अगर

आस किरण

 

एक कतरा

खुशहाली से भरा

उन्मुक्त हँसी

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Comment

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Comment by Neelam Upadhyaya on December 28, 2011 at 9:38am

Saurabh ji ewam Yograj ji,  bahut bahut dhanyawaad.  aise hi ek tuchchh sa prayas karti hoo, warna aap logo ki to chhaya bhi nahi chhu sakti...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 27, 2011 at 4:02pm

बहुत सधे और समृद्ध हाइकू पर मेरी बधाइयाँ स्वीकार करें.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 27, 2011 at 11:02am

आदरणीय नीलम जी, बहुत ही ज़बरदस्त हाइकु कहे हैं आपने,  सुन्दर सन्देश देते हुए ! हर पंक्ति अपने आप में स्वतंत्र  है जो कि आपकी रचनायों को एक कमाल की ऊंचाई प्रदान करती है, हार्दिक साधुवाद स्वीकार करें.  

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