कमर-तोड़ महंगाई पे,बारम्बार चुनाव!
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क्या बात! बहुत-बहुत बधाई बहुत सुन्दर दोहे लिखे हैं अविनाश जी।
बहुत सुंदर दोहे लिखे हैं. बधाई...अविनाश जी.
बहुत अच्छे दोहे, अविनाश भाई. बहुत-बहुत बधाई.
उपरोक्त दोहे की जितनी तारीफ़ करूँ कम होगा. दोहे के लिये आवश्यक पैनी दृष्टि और अति सधे विचार के लिये भाई आपको हृदय से बधाई दे रहा हूँ. आपने वस्तुतः बताया है जमीन की बात करने वाले कवि का वैचारिक आयाम क्या हो. वाह !!
एक अनुरोध : पहले दोहे में पहली पंक्ति को दूसरी और दूसरी पंक्ति को पहली पंक्ति करके देखा जाय. इस थोड़े से फेर-बदल से कथ्य कुछ अधिक निखर कर सामने आयेगा क्या?
संजय भाई, दोहे में गुरु+लघु भूल गए क्या ??????????
सारे दोहे आज की, सच्ची खींचे चित्र
जागे सारा देश भी, यही कामना मित्र
बढ़िया प्रासंगिक दोहावली आदरणीय अविनाश भाई.... सादर बधाई.
AjAy Kumar Bohat ji bahut-bahut aabhar.
सुन्दर गुलदस्ता बनी, दोहावली जनाब
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