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हाइकू.

१-- चुनाव आया
नेताओं की बला से
    तनाव लाया!
***
२- ईमानदार
निभाना है मुश्किल
   ये किरदार!
***
३- ये गंगा-जल
हाँथ में रख कर
   सच उगल!
***
४- ये जिंदगानी
समय की नदी में
   बहता पानी.
***
५- विनाशकाले
विपरीत है बुद्धि
   जान बचा ले.
६-मूर्ख-अज्ञानी
दोस्तों से भला एक 
 दुश्मन -जानी.
७- मतदान ये
तेरा अधिकार  है
मत दान दे.
***
8- लिखे  हाइकू
सर खुजा के मियां
बोले काय कू?
***
अविनाश बागडे.

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Comment

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Comment by AVINASH S BAGDE on February 6, 2012 at 7:04pm

aabhar Rajesh kumari ji.

Comment by AVINASH S BAGDE on February 6, 2012 at 7:04pm

ok Gnesh ji BAGI....thanks.

 तीनों पंक्तियाँ एक-दूसरे से संपृक्त होती हैं...ok Saurabh ji....aabhar.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 29, 2012 at 3:01pm

आदरणीय बागडे साहब, कथ्य बहुत ही बढ़िया है, जैसा की आप जानते है हाइकु केवल ५-७-५ वर्णों का संयोजन मात्र ही नहीं है बल्कि शर्त यह भी है कि तीनों पक्तियां स्वतंत्र हो |

उदाहरण स्वरुप -- "मैं भी हाइकु लिखना जनता हूँ कल लिखूंगा"

अब इसे मैं तोड़ दूँ ------

मैं भी हाइकु

लिखना जनता हूँ

कल लिखूंगा

तो क्या यह हाइकु हुआ ?

ठीक उसी तरह

ये गंगा-जल

हाँथ में रख कर
सच उगल!
अब इसे यदि मैं एक साथ लिखूं तो ....."ये गंगा-जल हाँथ में रख कर सच उगल"

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 28, 2012 at 8:23am

 बहुत शानदार हाइकू 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 27, 2012 at 10:20pm

भाई अविनाशजी,  आपकी कोशिश अच्छी बन पड़ी है.  आपने शिल्प को बेहतर निभाया है. 

हाइकू के साथ एक बात और होती है - तीनों पंक्तियाँ एक-दूसरे से संपृक्त होती हैं और वे एक ही वाक्य के तीन टूकडे हैं ऐसा एकदम से प्रतीत नहीं होना चाहिये.  इस मानक पर रचनाकार को अपनी त्रिपदियाँ थोड़ा और कसने की आवश्यकता होती है.  आपने भी इसके लिये कोशिश की है.

प्रयासरत रहें, भाई जी.   सादर ..

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