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आँसू


तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .
तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.

जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.
तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

अगर मैं आँख में निकलू नज़ारे धुँधले हो जाए .
मुझे ही देख पाओ तुम तुम्हें मैं ही नज़र आऊ.
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

कभी ऐसा भी हो निकलू तो पलकें बंद तुम कर लो.
अंधेरा हो घना और मैं सुख की नींद सो जाऊ .
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 29, 2012 at 4:43pm

इस रचना  के लिये हार्दिक बधाई, मुकेश जी


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 29, 2012 at 2:46pm

मुकेश जी, बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति है, सुन्दर रचना , बधाई स्वीकार करें |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 29, 2012 at 10:05am

bahut hi bhaavpravan kavita.

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