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पुरुष और प्रकृति

जब उठाया घूंघट तुमने,

दिखाया मुखड़ा अपना

चाँद भी भरमाया

जब बिखरी तुम्हारे रूप की छटा

चाँदनी भी शरमायी

तुम्हारी चितवन पर

आवारा बादल ने सीटी बजाई ।

तुमने ली अगंड़ाई, अम्बर की बन आई

तुमसे मिलन की चाह में फैला दी बाहें,

क्षितिज तक उसने

भर लिया अंक में तुम्हें, प्रकृति, उसने

तुम्हारे गदराये बदन, मदमाते यौवन पर,

भँवरे की तरह

फिदा होकर, तुम्हारे रसीले होठों से

रसपान किया उसने ।

नारी ने तुमसे ही सीखा श्रृंगार, प्रकृति

पुरुष ने सीखी मनुहार

एक रिश्ता कायम हुआ फिर

‘समर्पण’ का

पुरुष की कठोरता और

नारी की मधुरता का

पुरुष की मनुहार और

नारी की लज्जा का

पुरुष और प्रकृति एकाकार हुए ।

  • मोहिनी चोरडिया

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Comment

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Comment by asha pandey ojha on February 16, 2012 at 4:29pm

sunadr rachna 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 9, 2012 at 11:20am

ek rishta kayam hua ...bahut sundar bhaavon ko kavita ke sootra me piroya hai.

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on February 9, 2012 at 10:45am

IT'S OUR PLEASURE JI

Comment by mohinichordia on February 9, 2012 at 10:07am

 उत्साह बढाने के लिये आप सबका आभार , दीपक जी राज जी ,अविनाश बागडे जी ,राज बुन्देला जी ,नजील भाई आशुतोष जी आ. .बागी जी  \

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on February 8, 2012 at 12:12pm
सत्यता से ओत प्रोत सुन्दर रचना
दीपक 'कुल्लुवी'
Comment by राज लाली बटाला on February 7, 2012 at 10:03pm

सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई  मोहिनी चोरडिया जी!

Comment by AVINASH S BAGDE on February 7, 2012 at 8:36pm

एक रिश्ता कायम हुआ फिर

‘समर्पण’ का

पुरुष की कठोरता और

नारी की मधुरता का

पुरुष की मनुहार और

नारी की लज्जा का

पुरुष और प्रकृति एकाकार हुए ।...SUNDER Mohini ji.

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 7, 2012 at 6:08pm

सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई

Comment by Nazeel on February 7, 2012 at 5:26pm

मेरे पास शब्द ही नहीं है आदरणीया  मोहिनी जी  कि मै आपकी रचना के बारे मै कुछ कह सकूं .....उत्तम  रचना  के लिए  हार्दिक बधाई


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 7, 2012 at 4:29pm

पुरुष और प्रकृति का अनुपम संगम, बहुत ही सुन्दर रचना, अभिव्यक्ति की इस खुबसूरत प्रस्तुति पर अनेको बधाई आपको, 

कृपया ध्यान दे...

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