For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ. 

आओ हम सब मिलकर गायें 
ओ.बी.ओ. महान है 
भटकते फिरते जो ज्ञान की खातिर 
उनके लिए वरदान है 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ..२ बार 
गजल छन्द कई भाषाओँ के  उपलब्ध  विधान हैं 
कहानी  कविता का  मिलता यहाँ सम्यक ज्ञान है 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
नए पुराने धर्म जाति का न कोई भेद है 
भिन्न भिन्न विधा है सबकी आपस में एक हैं 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
लिखो कविता या कहानी श्रेष्ठ को मिले  पुरूस्कार है
नहीं होती किसी को  ईर्ष्या ऐसा सुखी परिवार है. 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
प्रीतम और रवी का पौधा सींचते बागी हैं 
बड़े बड़े दिग्गज यहाँ साहित्य सुधा के रागी हैं 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
आओ सब मिलकर ऐसी अलख जगाये हम 
साहित्य समरसता की पावन गंगा बहायें हम 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
कई भाषाओँ और विधा में पारंगत गुरु विद्या दान करें 
माँ भारती , सरस्वती संग ओ.बी.ओ. का गुण गान करें 
जय जय ओ.बी.ओ.  जय जय ओ.बी.ओ.  ...२ बार 
जय ओ.बी.ओ. , जय हिंद, वन्दे मातरम् 

Views: 565

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 9:42pm

स्नेही मृदु जी , सादर  ,   आईये हम सब मिल गायें जय ओ.बी.ओ.. धन्यवाद. स्नेह बनाये रखिये. 

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 9:37pm

ओ बी ओ के प्रति ऐसे उन्नत भावों से लिखी गई रचना पर बधाई स्वीकार करें सर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 9:37pm

आदरणीय केसरी जी, सादर,   आप भाव के प्रति नतमस्तक हैं मेरा प्रयास सफल हुआ. मैं आपकी इस भावना के प्रति नतमस्तक हूँ, धन्यवाद. स्नेह बनाये रखिये. 

Comment by वीनस केसरी on April 6, 2012 at 12:48am

वाह प्रदीप जी, इस सुन्दर भावना के सम्मुख नत हूँ

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 10:52pm

स्नेही वाहिद जी.,  सादर , अब भी कहने की बात है. हम लोग कहाँ से जुदा जुदा दीखते हैं. धन्यवाद. प्रोत्साहन हेतु. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 10:51pm

आदरणीय सौरभ गुरु जी.,  सादर प्रणाम  हीरा न भी बनू पर ये सौभाग्य क्या कम है की आप जैसी संगत में खड़े होने को मिला और बात होती है. धन्यवाद. प्रोत्साहन हेतु. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 10:48pm

आदरणीय बागी जी,  जीवन के शेष क्षण राष्ट्र के काम आ जाएँ बस. साहित्य सेवा भी राष्ट्र का एक अंग हैं. आप विद्वानों की तरह मैं मंदिर की मूर्ति में बसा भगवान् तो नहीं हूँ हाँ सफाई का का कार्य ही करता हूँ.  ओ.बी.ओ. गीत मेरी तमन्ना है.  अगर कार्यक्रम में बजे तो अच्छा रहेगा. धन्यवाद. प्रोत्साहन हेतु. 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 5, 2012 at 8:30pm

आपके ही विचार मेरे भी विचार हैं! एक तरह से आपने मेरे भावों को भी शब्द दे दिए हैं| आपके लिए कोटिशः बधाईयां!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 5, 2012 at 6:23pm

आदरणीय प्रदीपजी,  हमें मालूम है इस मंच के प्रति आपका लगाव और सदस्यों के प्रति आपकी सदाशयता ने आपको इस गीत की प्रेरणा दी है. हम सभी आपकी इस साहित्यिक यात्रा के भाग्यशाली गवाह हैं.  यह वाकई रोचक है.

आपका निरंतर लेखन ही आपका प्रथम गुरु है आदरणीय.  मैं ऐसा आपके सीखने की भाव-तीव्रता के क्रम में आप द्वारा हुए उद्बोधनों, जिसे आपने इस मंच की कई-कई टिप्पणियों में खुल कर किया है, के कारण कहने की हिमाकत कर रहा हूँ.

इस गीत की भाव-दशा प्रणम्य है.  सादर.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 5, 2012 at 5:33pm

आदरणीय प्रदीप जी, ओ बी ओ के प्रति आपके भावनाओं को सलाम तथा इस अभिव्यक्ति पर साधुवाद |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service