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मेरा यार मुझसे जुदा हुआ,                                               

मेरी जान जैसे निकल गई.

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई.

उसे चाहना या न चाहना

उसे पूजना या न पूजना 

मेरी चाहतों का हिसाब क्या,

मेरी रूह भी हो विकल गई..

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

कोई और तेरा न नाम ले 

तुझे रख सकूँ निगाह में

तेरी बात भी जो हुई कहीं,

जुबाँ यार मेरी फिसल गई..

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

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Comment

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 18, 2012 at 11:10pm

बहुत सुंदर रचना । बधाई कबूल करें ! अति सुंदर !

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 21, 2012 at 7:20pm

आदरणीया महिमा जी प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत आभार

Comment by MAHIMA SHREE on April 21, 2012 at 10:15am
मेरी आह मुझमे ही मिल गई..
कोई और तेरा न नाम ले
तुझे रख सकूँ निगाह में
तेरी बात भी जो हुई कहीं,......भावपूर्ण अभिवयक्ति बधाई आपको
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 20, 2012 at 11:20am

आदरणीया राजेशकुमारी मैम प्रोत्साहन पर कोटि कोटि धन्यवाद,"


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 20, 2012 at 7:32am

शलेन्द्र जी विरह व्यथा और प्यार खो देने का गम दोनों झलक रहे हैं आपकी रचना में दिल की गहराई से निकले भाव ...इस सुन्दर रचना के लिए बहुत बधाई 

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 19, 2012 at 11:36pm

आदरणीय प्रदीप सर सादर नमन,प्रोत्साहन हेतु कोटि कोटि धन्यवाद सर

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 19, 2012 at 11:36pm

आदरणीय  SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR सर सादर नमन,

प्रोत्साहन हेतु कोटि कोटि धन्यवाद सर

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 19, 2012 at 11:35pm

आदरणीय बागी  सर सादर नमन, "जौ माँगा पाइअ बिधि पाहीं, ए रखिअहिं सखि  आँखिन्ह माही."

प्रोत्साहन हेतु कोटि कोटि धन्यवाद सर

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 19, 2012 at 11:34pm

आदरणीया सरिता दी प्रोत्साहन हेतु कोटि कोटि धन्यवाद

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 18, 2012 at 10:40pm

मुझे प्यार उसका न मिल सका,

मेरी आह मुझमे ही मिल गई..

bhav purna rachna. badhai.

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