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गुमनाम है
बड़ा बदनाम है
हाँ गुलाम है.
....................
रिश्ते नाते हैं
बड़ा ही रुलाते हैं.
टूट जाते हैं.
..................
वृक्ष रोते हैं
जनता हंसती है,
कैसी बस्ती है.
.......................
सुखा कंठ है,
मनवा उदास है,
कैसी प्यास है.
.......................
 तू ही जीत है
तुझसे ही प्रीत है,
तू ही मीत है.
.....................
 भ्रष्टाचार है,
ठोस जनाधार है,
 सरकार है.
.....................

यह मेरा हाइकु लिखने का छोटा सा प्रयास है कृपया सुधिजन त्रुटियों पर मार्गदर्शन दें.प्रसन्नता होगी.

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Comment

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Comment by Mohammed Arif on April 10, 2017 at 8:37pm
आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब, हाइकु लेखन का आपका सफल प्रयास है । सभी हाइकु अपने आप में बेजोड़-बेमिसाल है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 10, 2017 at 8:05pm
मैं यहाँ केवल रचनाएँ पढ़ने के लिए उपस्थित हुआ था। लेकिन बेहतरीन बहुआयामी भावपूर्ण कथ्य व शिल्पबद्ध हाइकू रचनाओं ने लोग-इन करने को विवश कर दिया। मुझे विशेष रूप से 1, 2, 3 व 6 बहुत पसंद आये हैं। लगता नहीं है कि यह पहला प्रयास है ! हमें आपसे सीखने को ही मिला व मिलेगा। सादर हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहब।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 10, 2017 at 8:02pm
हाइकू ही हैं
कथ्य शिल्पबद्ध हैं
धारदार हैं।

/तू ही जीत है..../वाले हाइकू को बेहतरीन आप बना सकते हैं। सादर
Comment by RAMESH SHARMA on April 10, 2017 at 4:34pm

बहुत सुंदर हाइकु आदरणीय 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 18, 2012 at 6:22pm

आदरणीय बाली जी
                  नमस्कार, आपकी सराहना ही मेरे लिए प्रेरणा है. आभार

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 16, 2012 at 4:56pm

अशोक भाई आपका  हाइकु लिखने का छोटा सा प्रयास है लेकिन मुझ जैसे पाठकों के लिए बहुत बड़ा उपहार  है। ऐसे ही आप लिखते रहें !बहुत सुंदर !

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 7, 2012 at 7:30am

भ्रमर जी
        सादर, आपकी शुभकामनाएं अवश्य ही प्रेरणा देंगी.धन्यवाद.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 6, 2012 at 10:14pm

वृक्ष रोते हैं
जनता हंसती है,
कैसी बस्ती है.
.......................

भ्रष्टाचार है,
ठोस जनाधार है,
 सरकार है.

प्रिय अशोक जी हरी ओउम बहुत सुन्दर सन्देश ...अच्छे हाइकू.. म्हणत और रंग लाएगी --भ्रमर ५ 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 6, 2012 at 9:06pm

गौरव जी,
                 सादर, आपके मेल पर जानकारी मै दे ही चुका हूँ. आप अवश्य प्रयास करें मुझे भी प्रसन्नता होगी. धन्यवाद.

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 6, 2012 at 9:04pm

आदरणीय अविनाश जी,
सादर, आपकी सराहना से प्रसन्नता हुई. धन्यवाद.

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