For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कौरवों के साथ में धृतराष्ट्र अँधा है

कौरवों के साथ में धृतराष्ट्र अँधा है
धर्म है पाखंड सा हर दिल दरिंदा है

हिंद में ही लुट रही क्यूँ लाज हिंदी की
पश्चिमी रंग में रंगा हर एक बंदा है

ना हया ना शर्म है आदम के अन्दर अब
औ सनातन धर्म भी मंदिर में धंधा है

आज तक अच्छा किया ना एक नेता ने
जो करे अच्छा यहाँ वो ही तो गन्दा है

फिक्र तुझको हो रही जो आज रुखसत की
खानदानी ना सही यारों का कन्धा है

भीख ना मिलती गरीबों के लिए कुछ भी
"दीप" गुंडा फिर रहा लेता जो चंदा है

संदीप पटेल "दीप"

Views: 689

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:41pm

aapka bahut bahut aabhari hun aadarniyaa rajesh kumari ji apne jo meri is ghazal ko padha aur haushalafajai ki uske liye tahe dil se shukriya aapka

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:38pm

aapka bahut bahut shukriya aur saadar aabhari hun @bhawesh ji .........

Comment by Bhawesh Rajpal on May 10, 2012 at 10:14am
आज की राजनीति व्  सामजिक  वातावरण पर चोट  !
छल-प्रपंच ,जोड़-तोड़, नेता का मकसद  वोट  !
बहुत-बहुत  बधाई ! 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 9, 2012 at 5:40pm

आज की परिस्थतियों पर अच्छा कटाक्ष किया है दीप जी बहुत खूब 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:23pm

आपका तहे दिल से शुक्रिया इस हौशलाफजाई के लिए dilbag virk जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:22pm

ह्रदय से आभारी हूँ आपका Arun Kumar Pandey 'Abhinav जी
अपना स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:21pm

बहुत बहुत शुक्रिया इस हौशलाफजाई के लिए CHOTU SINGH जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:20pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया और सादर आभार ganesh lohani जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:19pm

ह्रदय से आभारी हूँ आपका, बहुत बहुत शुक्रिया इस हौशलाफजाई के लिए MAHIMA SHREE जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 7, 2012 at 10:16pm

आपका तहे दिल से शुक्रिया इस हौशलाफजाई के लिए PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service