For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई

आज 31 मई विश्व  तम्बाकू  विरोधी दिवस पर एक  विशेष रचना


सुट्टों ने सोखा जिस्म, सेहतमन्दगी गई
धुंए का शौक लग  गया तो  ज़िन्दगी गई

छुप छुप के पीना छोड़, खुल्लेआम पी रहे
माँ की  लिहाज़,  बाप से शरमिन्दगी गई

गुटखा चबाने वाले की पिचकारी गज़ब थी
धोयी बहुत दीवार, पर न गन्दगी गई

ज़र्दा चबा चबा के मुँह को सन्त कर दिया
अब स्वाद और मसालों की पसन्दगी गई

अलबेलाजी दिन रात खोहों खोहों खांसते
पूजा, हवन,  नमाज़ गई,  बन्दगी गई

जय हिन्द !

Views: 1266

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Albela Khatri on June 3, 2012 at 5:00pm
आपका शुक्रिया चन्दन राय जी..........
Comment by chandan rai on June 3, 2012 at 4:06pm
अलबेला जी,
गुटखा चबाने वाले की पिचकारी गज़ब थी
धोयी बहुत दीवार, पर न गन्दगी गई,
संवेदनशील विषय पर खूब लिखा आपने ,
Comment by Albela Khatri on June 3, 2012 at 1:53pm

धन्यवाद......अशोक कुमार रक्ताले जी...आपने उम्दा विस्तार दिया

Comment by Albela Khatri on June 3, 2012 at 1:48pm

सम्मान्य बागी जी,  आपकी सराहना और  हौसला अफज़ाई तो ठीक है लेकिन  'राजाकार" ने तो महफ़िल लूट ली........गज़ब ढा दिया  जी.,.,...मैंने कहा "बल्ले बल्ले"  कर दिया  ..हा हा हा "राजाकार धूम्र पान भूरापश्च स्वेत दंडिका"

मेरे ख्याल से ये आपने  फ़िल्टर  सिगरेट के लिए  फ़रमाया होगा ....अब लगे हाथ ये भी बता दीजिये कि बुड्ढा छाप बीड़ी को इस  दिव्यभाषा में  क्या कहेंगे?          

आपकी दाद सर आँखों पे हुज़ूर....बस आप देते रहिये....जय हो आपकी


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 3, 2012 at 11:07am

अलबेला जी एक विषय को सन्दर्भ बना कर बहुत ही प्यारी ग़ज़ल कही है, यह ग़ज़ल मंच लुटने की मादा रखती है, आप सुना कर देखिएगा...तालियाँ न बजी तो कहियेगा और प्रस्तुति के बाद आपके लिए राजाकार धूम्र पान भूरापश्च श्वेत दंडिका अवश्य आपकी खिदमत में हाजिर :-))))))))))) 

बहुत बहुत दाद स्वीकार कीजिये |

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 3, 2012 at 6:27am

आदरणीय अलबेला जी,
                              ज़र्दा चबा चबा के मुँह को सन्त कर दिया
                 अब स्वाद और मसालों की पसन्दगी गई
                 और इस पंक्ति को विस्तार दूँ तो फिर अस्पतालों में बाकी की जिंदगी गयी. अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस पर आपकी सुन्दर रचना. बधाई.

Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 12:41pm

aapka khoob khoob  aabhaar Rekha Joshi ji,

aapki sarahna ka shukraguzar hoon.......

Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 12:03pm
आभारी हूँ "सूरज" जी..........शुक्रिया .....
Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 10:01am

आपका हार्दिक आभार आशीष जी.........बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by आशीष यादव on June 1, 2012 at 9:14am

बेहतरीन गजल। हास्य का सम्पुट लिये बेहतर सीख दे रही है।
शानदार गजल पर मेरी भी बधाई स्वीकारें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service