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यहाँ सभी की आँख सजल है बाबाजी


जिधर देखिये, जल ही जल है बाबाजी
यहाँ सभी  की आँख सजल है बाबाजी



लोग जिसे गंगाजल कह कर  पीते हैं
वह   गंगा  का  अश्रुजल  है  बाबाजी



एक लीटर की बोतल पन्द्रह रुपयों में
जल  है  इसमें  या  डीज़ल है बाबाजी



भड़क गया मैं देख के उसके दस बच्चे
वो बोला, मालिक का फज़ल है बाबाजी



गुजराती कन्याओं के ज़्यादातर नाम
सेजल, केजल और किंजल है बाबाजी 



तुम कसाब  को लेकर ही गुस्साये हो
यहाँ अभी ज़िन्दा अफजल है बाबाजी



कई विधाएं  हैं  'अलबेला' कविता  की
किन्तु जग विख्यात ग़ज़ल है बाबाजी



JAI HIND !


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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 8, 2012 at 10:35pm

dhnyavaad bhai yogesh ji..........aabhaar

Comment by Albela Khatri on June 8, 2012 at 10:33pm


महंगाई का ज़माना है बाबू.......
हा हा हा
आपकी सराहना के लिए धन्यवाद
योगेश जी.......

Comment by yogesh shivhare on June 8, 2012 at 10:31pm

एक लीटर की बोतल पन्द्रह रुपयों में
जल  है  इसमें  या  डीज़ल है बाबाजी...tatkalik halon ko badi sundarta se jikra kiya hai.

Comment by yogesh shivhare on June 8, 2012 at 10:30pm

ati sundar albela ji.....ek hi gagar me sare sagar bhar diye.

Comment by Albela Khatri on June 8, 2012 at 10:15pm

हाँ ...मैंने सोचा  थोक में ही निपटाओ....हा हा हा
धन्यवाद  कुमार गौरव जी !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 8, 2012 at 10:13pm
जय हो बाबाजी...वो दस बच्चोँ वाली बात बड़ी मजेदार है।

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