For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सरकार पहले अपनी फिजूलखर्ची बंद करे....राजीव गुप्ता

सरकार पहले अपनी फिजूलखर्ची बंद करे
 
यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ने पिछले महीने अपनी सरकार की उपलब्धियों का "जनता के लिए रिपोर्ट 2011 -2012 "  मे लेखा - जोखा पेश करते हुए कहा था कि भारत में आर्थिक विकास दर अब तेजी के पथ पर है लेकिन इसका लाभ अभी हमारे लाखो गरीबो को पहुचना बाकी है ! परन्तु योजना आयोग ने  पिछले दिनों गरीबो के लिए आलीशान शौचालय बनवाकर सोनिया जी की इन बातो को झुठला दिया ! गौरतलब है कि योजना आयोग के मुताबिक रोजाना 28 रुपए से ज्यादा खर्च करने वाला गरीब नहीं है ! गरीबी की 'अनूठीपरिभाषा तय करने वाले योजना आयोग की "फिजूलखर्ची" का नमूना यह है कि उसने अपने  शौचालयों की मरम्मत पर ही 35 लाख रुपए खर्च कर  डाले ! सूचना अधिकार कानून (RTI) के तहत दाखिल एक अर्जी के जवाब से यह आंकड़ा सामने आया है ! हालांकि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह इस बारे में अब सफाई दे रहे हैं कि यह रकम सिर्फ  शौचालयों पर खर्च नहीं की गई और यह खर्च सचमुच जरूरी था ! ध्यान देने योग्य है कि पिछले वर्ष अगस्त महीने में प्रधानमंत्री को इसी योजना आयोग ने  विकास दर बढ़ाने के मंत्र  दिए थे जिसमे से एक  प्रमुख मन्त्र सरकारी - खर्च को कम करने को लेकर था ! सरकारी खर्च कम करने के चलते और बदहाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार द्वारा नयी नौकरियों पर रोक तक लगाने की बात कही गयी !  
 
बढ़ती महगाई ने एक तरफ जहा आम आदमी का जीना दूभर कर रखा है तो वही दूसरी तरफ गिरती विकास दर ने भारत की पूरी अर्थव्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है जिसकी पुष्टि अभी हाल में ही प्रधानमंत्री ने भी की ! दुनिया भर में आर्थिक बदहाली के चलते भारत सहित समूचा विश्व फिर से आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रहा है ! आगे आने वाले दिन भारत के लिए बहुत ही कष्टदाई हो सकते है क्योंकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह दूसरा स्लोडाउन ज्यादा लंबा और गहरा हो सकता है ! फिर ऐसी हालत ऐसे समय आ रही हैजब भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही डगमगाई हुई है ! विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही हैसरकार कमजोर दिख रही है और उसका सारा लेखा - जोखा बिगड़ा हुआ है ! बाज़ार में रूपये की कीमत लगातार घाट रही है ! विदेशी निवेशक भाग रहे हैं और बिजनेस की उम्मीदें अंतिम सांस लेने के कगार पर है ! सभी अर्थशास्त्री अब एक सुर में सुर मिलाकर बोल रहे है कि ऐसी खस्ता हाल के लिए जिम्मेदार हमारी सरकार की अपनी गलतियां  हैजिसके लिए केवल दुनिया की खराब हवाओं को कसूरवार ठहराया जाना ठीक नहीं है ! परन्तु यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी के अनुसार उनकी सरकार के कार्यक्रम न केवल लाभकारी है अपितु नीतिया भी सही है ! 
 
आर्थिक अपंगता की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए  बुधवार को  मनमोहन की अगुआई वाली यूपीए - सरकार ने पूर्व राजग सरकार की तर्ज पर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केन्द्रित कर कुछ योजनाओं को हरी झंडी दिखाकर सरकार को "चलती हुई सरकार" के रूप में दिखाने की कोशिश की ! जिसमे रेलवे नागरिक विमाननसड़ककोयलाबिजली और बंदरगाह से सम्बंधित लगभग चार दर्जन योजनाये शामिल है ! ध्यान देने योग्य है कि पूर्व प्रधानमंत्री की अगुआई में वर्ष 2000 - 2001 में  तत्कालीन केंद्र सरकार ने सड़कबंदरगाह और उड्डयन क्षेत्र में निवेश बढ़कर अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को तेजी से बढाया था ! इससे भारत के इत्मीनान और भरोसे की धाक जमी थी ! सही ठिकाने की तलाश में तड़प रही विदेशी पूंजी को यहां आने की हिम्मत हुई जिससे तत्कालीन सरकार की साख भी बढी  थी ! सरकार के इन फैसलों से अभी तक बदकिस्मती से ठप नजर आ रही सरकार थोड़ी खिसकती हुई दिखी ! अन्यथा  सरकार का अभी तक सारा ध्यान घोटालोंआंदोलनोंअसंतोष और सियासत पर ही था ! सरकार को अब इस आर्थिक बदहाली से बाहर आने के लिए उसे इन मुद्दों को निपटाकर अपनी बची-खुची साख बचानी चाहिए !
 
वित्‍त वर्ष 2012-13 अवसंरचना के लक्ष्‍यों को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह के  अनुसार पिछले आठ वर्षों के दौरान आकर्षक उच्‍च वृद्धि दर प्राप्‍त करने और विश्‍व में दूसरी सबसे तेज बढती बडी अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में उभरने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था अब अत्‍यधिक मुश्किल दौर से गुजर रही है ! चारों तरफ यूरोजोन चिंता का कारण बना हुआ है ! घरेलू स्‍तर पर बढती मांग के साथ-साथ आपूर्ति पक्ष में मौजूदा अवरोधकों के कारण महंगाई पर दबाव बढ़ रहा है !  इन सभी कारकों के कारण एक विकट आर्थिक चुनौती है !   हालाँकि पिछले वर्ष औद्योगिक चैंबर पीएचडीसीसीआई के पूर्व जनरल सेक्रेटरी कृष्ण कालरा का कहना है आर्थिक मंदी की मार ज्यदा भारत पर ना पड़े इसलिए  सरकार को मांग में बढ़ोत्तरी करने के साथ - साथ अपने घरेलू बाजार को ज्यादा मजबूत बनाना चाहिए !  महंगाई को कम करके औद्योगिक उत्पादन की दर को बढ़ाना होगा ! साथ ही यूरोपीय देशों को छोड़कर भारत को अब अपने पड़ोसी देशों और अन्य देशों के बाजारों की तरफ आयात की गाड़ी मोड़नी होगी ! अगर भारत ऐसा कर पाया तो निश्चित तौर पर इस मंदी का सही तरीके से  केवल हम मुकाबला कर पाएंगे बल्कि अपनी ग्रोथ रेट को भी तर्कसंगत स्तर पर भी रख पाएंगें ! 

वर्तमान सरकार को चलाने की डोर जाने माने अर्थशास्त्रियों के हाथ में है ऐसा कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है ! एक तरफ जहा प्रधानमंत्री और मोंटेक सिंह अहलूवालिया दुनिया के जाने - माने अर्थशास्त्री है तो वही वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी 1986 में यूरोमनी द्वारा दुनिया के सर्वोत्तम वित्त मंत्री के रूप में सम्मान प्राप्त कर चुके है ! अतः भारत की जनता  इनसे आर्थिक सुधार के मुद्दों पर कुछ करिश्माई जरूरी कदम लेने की आस से देखती  थी ! भारत की अर्थव्यवस्था की ऐसी हालत की आहट कई दिनों पूर्व ही रेटिंग एजेंसियों ने दे दी थी ! गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैडर्ड एंड पूअर्स ने राजकोषीय घाटे की बिगडती स्थिति तथा नीति-निर्णय के स्तर पर चलते राजनीतिक दिशाहीनता को देखते हुए भारत की रेटिंग को नकारात्मक कर दिया था ! इतना ही नहीं एक अन्य रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की ख़राब होती अर्थव्यवस्था के लिए श्री मनमोहन सिंह को ही जिम्मेदार ठहराया था ! इन एजेंसिया की विश्वव्यापी इतनी बड़ी साख है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनकी रिपोर्टो के आधार पर ही विदेशी अन्य देशो में निवेश करते है !
 
हालाँकि 9 प्रतिशत की विकास दर के लिए इस वित्त वर्ष में सरकार ने ढांचागत क्षेत्र में 2 लाख करोड़ रूपये के निवेश का लक्ष्य रखा है ! गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख डॉ. चक्रवर्ती रंगराजन पहले ही कह चुके हैं कि भारत को गरीबी से बाहर निकालना है तो उसे हर साल पर्सेंट की ग्रोथ रेट हासिल करनी होगी ! ऐसा करने से बाज़ार में रौनक लौटेगी ! बाज़ार में नौकरियों के ज्यादा अवसर पैदा होंगे और गरीबी कम करने में मदद मिलेगी !  सरकार आम आदमी के साथ खडी दिखे जिसके दम पर वो सत्ता में आई थी ! परन्तु यह सब तभी संभव होगा जब पेट्रोलियम मंत्रालय और योजना आयोग अपनी जगहंसाई वाले ऐसे कृत्यों से बाज आये ! गौरतलब है अभी हाल में ही पेट्रोल की कीमतों में  एकाएक 7 .5 रूपये की वृद्धि कर दी गयी जिसके चलते पूरे देश में इस फैसले के विरोध में आम जनता सडको पर उतरी थी ! अन्यथा वो दिन दूर नहीं कि इस सरकार का वैसा ही ह्र्स्न होगा जो अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के चुनाव में हुआ था ! ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में हुई हार की समीक्षा के लिए कांग्रेस द्वारा बनाई गयी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जिम्मेदार कारणों में से मंहगाई के साथ - साथ एक प्रमुख कारण नेताओ की बेजुबानी भी था ! कही ऐसा ना हो कि आगामी लोकसभा चुनाव में सरकार की फिजूलखर्ची भी एक मुद्दा बन जाये इसलिए सरकार को अभी से ऐसे कृत्यों पर रोक लगानी होगी !    
 
राजीव गुप्ता , स्वतंत्र पत्रकार , 9811558925

Views: 350

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by yogesh shivhare on June 9, 2012 at 12:10am

Apke vicharon se sahmat hai  Rajiv ji ...bahut sundar

Comment by Albela Khatri on June 8, 2012 at 11:14pm

waah waah

JAI HIND !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
16 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
20 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
yesterday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service