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पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ  
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ
मासूम सी कली तू बगिया में खिली है 
थे कांटे वहाँ भी जिस घर में पली है 
चुन लूँ तेरे कांटे जीवन संवार लूँ
पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ

बचपन में तेरे माँ बाप यों सो गए 
खा गया था काल तुम थे रो रहे 
पालूंगा मैं तुझको सौ जीवन उधार लूँ
पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ

देता हूँ तुझे शिक्षा आन बान की 
रखना तू लाज मेरे घर की शान की  
कर दूँ तुझे विदा जीवन सुधार लूँ
पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ

बेटी तू इस घर की उस घर को जाएगी 
देखे हैं जो सपने उनको सजाएगी 
सपने जो हैं तेरे उन्हें साकार कर लूँ
पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 15, 2012 at 3:04pm

आदरणीय अलबेला खत्री जी, सादर अभिवादन 

आपने सराहा , तृप्ति हुई. धन्यवाद.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 15, 2012 at 3:00pm

आदरणीय अविनाश जी, सादर 

मर्म को जाना. बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 15, 2012 at 2:59pm

आदरणीय बिश्वजीत जी, सादर 

आपको गीत पसंद आया. धन्यवाद.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 15, 2012 at 2:58pm

आदरणीय मनु  जी,  सादर 

बधाई स्वीकार है. धन्यवाद.

Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 8:03pm

बहुत भावुक कर दिया प्रदीप जी,
इतना कोमल,  इतना मर्मान्तक  और इतना  उत्तम गीत प्रस्तुत करने पर आपका अभिनन्दन !
जय हो !

Comment by AVINASH S BAGDE on June 13, 2012 at 7:07pm

पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ
Pradeep ji,
jane kis kali ko kendrit kar aap ye rachana pesh kar rahe hai pata nahi kinu hai marm-sparshi..
shayad kuchh log ro bhi le...

Comment by Bishwajit yadav on June 13, 2012 at 2:16pm
प्रणाम प्रदीप जी
बहुत सुन्दर क्या बात है
ये पक्तियाँ मेर दिल को छु गई वैसे ये पुरा गीत अच्छा लगा जय हो
बेटी तू इस घर की उस घर को जाएगी
देखे हैं जो सपने उनको सजाएगी
सपने जो हैं तेरे उन्हें साकार कर लूँ
पानी के थपेडों से आ तुझ को बचा लूँ
जीवन की डगर कठोर आ गोदी में उठा लूँ
Comment by जगदानन्द झा 'मनु' on June 13, 2012 at 2:07pm

बहुत ही उम्दा रचना, बधाई स्वीकार करे प्रदीप जी ....

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