For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जगदानन्द झा 'मनु'
  • Male
  • Delhi
  • India
Share

जगदानन्द झा 'मनु''s Friends

  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"

जगदानन्द झा 'मनु''s Groups

 

जगदानन्द झा 'मनु''s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Delhi

जगदानन्द झा 'मनु''s Blog

धुँध

मैं धुँध को नहीं चीर सका तो क्या
आगे बढ़ने कि कोशिश तो की
कुछ कदम आगे मैं बढ़ा
सूरज भी कुछ कदम आगे की
मेरे सिर पर विजय मुकुट था
घटी चादर ज्योँ ही धुँध की


यह सोच गर मैं घर में रहता
धुँध बहुत हैं छायी
चलो रजाई तान कर सोएँ
बहुत सुहाबना मौसम हैं भाई
मेरे भाग्य की कलियाँ बंद होती
सूरज क्योंकर साथ मेरा देता
किसी अन्धेरे कोठरी में
मेरा नाम भी गुम गया होता


(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Posted on April 28, 2014 at 4:30pm — 4 Comments

मैं न जाने कहाँ खो गया

ढूंढने गया मैं खुद को

बाज़ार में

मैं न जाने कहाँ खो गया

चाँदी की खनक में

सोने की दमक में

मैं न जाने कहाँ खो गया



क्यों आया हूँ यहाँ

मैं क्या हूँ ?

मैं भूल गया

इस चमक-दमक की दुनियाँ में

मैं खुद को ही भूल गया



मैं भूल गया

मेरे हाथों में

कलम की ऐसी ताकत थी

ऊपर वाले की देन कहें

या हृदय की मेरी गागर थी



चलती थी

मेरी अश्रु स्याही से

भावो के मोती विखेरने को

समराग्नी की ताकत रखती थी

नव-निर्वाण की हुँकार…

Continue

Posted on June 23, 2012 at 1:30pm — 9 Comments

गीत -मैं भी कुछ सुनाऊँ तुमको, जो एसी भी शक्ति दी होती

मैं भी कुछ सुनाऊं तुमको,

जो ऐसी भी शक्ति दी होती



हे माँ तेरी चरणों में,

कुछ मेरी भी अर्जी तो होती



मैं दीन हूँ माँ समझो,

पर हीन न समझा करो



सीने से न अपने सही,

चरणों से न दूर करो



मैं पुत्र कुपुत्र हूँ माँ,

समझा न तेरे मन को



तुम तो माँ कुमाता नहीं,

समझो तो मेरे मन को



थोड़ा मुझ को भी दे दो माँ,

स्नेह अपनी झोली से तुम



है माँ बेटे का नाता,

माँ खोयी हो कहाँ तुम | …

Continue

Posted on June 7, 2012 at 1:00pm — 6 Comments

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

होता हूँ जब अकेला चुपके से आता है

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

कभी बन आँखों में आँसू

कभी बन दिल में कसक

रातों को जगाने सपनों में

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

मैं अपने गाँव का, गाँव मेरा है

उसके सपने सारे सपने मेरा है

होता हूँ जब अकेला चुपके से आता है

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

मैं अपने गाँव को सम्हालूँगा

मैं अपने सपनों को फिर से सजाऊंगा

टूटा हुआ तारा हूँ मैं जिस गाँव का

फिर से…

Continue

Posted on June 6, 2012 at 5:30pm — 12 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा
"बहुत-बहुत शुक्रिया आ. कल्पना मैम. आभारी हूँ. सादर."
16 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post विद्वता के पैमाने /लघुकथा
"सादर आदाब आ. समर सर. जी, मुझे याद है. आप जैसे साहित्य अनुरागी को यदि मेरी लघुकथाएँ पसन्द आती हैं तो…"
21 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post विद्वता के पैमाने /लघुकथा
"लघुकथा पसन्द करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आ. अजय जी. मीर का शेर साझा करने के लिए हृदय से…"
24 minutes ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"इस सम्मान पर मेरी तरफ़ से भी ढेरों बधाई प्रेषित है आ. राजेश मैम. सादर."
37 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून
"अच्छा प्रयोग है आ. पंकज जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
38 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"शानदार क्षणिकाएँ है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
41 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post ब्रेन वाश(लघु कथा)
"बढ़िया लघुकथा है आ. मनन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. असहिणुता = असहिष्णुता "
42 minutes ago
Mahendra Kumar commented on विनय कुमार's blog post जुनून--लघुकथा
"रफ़्तार के जुनून पर केन्द्रित अच्छी लघुकथा है आ. विनय जी. दुआ करने वाली महिला पात्र राजन की कौन थी,…"
50 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल है आ. निलेश सर. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
57 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में

२१२२/ २१२२/२१२२  . ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में याद आता है मुझे वो बेख़ुदी में. . काश उन के लब…See More
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
1 hour ago
सतविन्द्र कुमार posted blog posts
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service