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मैथिली साहित्य

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मैथिली साहित्य

इस ग्रुप मे मैथिली साहित्य लिखा जा सकता है |

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Members: 32
Latest Activity: Sep 20, 2016

Discussion Forum

प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी (बाबा के गीत ) 1 Reply

प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ.......प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौआहाँ केर नगरी सुन्दर नगरी ,कोना कय पेबई दरसन यौ कोना -कोना…Continue

Started by kanta roy. Last reply by जगदानन्द झा 'मनु' Sep 20, 2016.

जकरे देह में आगि लगैत छैक सैह ने जड़ैत अछि (लघुकथा)

एक दिन दू आदमी के झगड़ा होइत रहैक , जकर गलती रहइ से ओहि ठाम उपस्थित लोक के बेर - बेर दोसर के इंगित कs कहय जे एकर बात पर हमरा देह में आगि लागि जाइत अछि । ओहि लोकक बीच में एकटा पंडीजी सेहो रहथि , ओ…Continue

Started by SANJAY KUMAR JHA Aug 23, 2015.

अथ फिनायल कथा ! 1 Reply

दुःख हरो द्वारका नाथ शरण मैं तेरी ……. ! मोबाइलक घण्टी बाजल ! स्क्रीन पर चमकै छल “ कनियाँ के फोन ” ! इग्नोरक त प्रश्ने नहि !! धरफरा क फोन उठौलौं ----- हेलौ ! .... कहु ! सब ठिक कि ने ?---- की ठीक ! ...…Continue

Tags: मैथिली

Started by SANJAY KUMAR JHA. Last reply by SANJAY KUMAR JHA Aug 23, 2015.

बेटी आ बहिनक मनोरथ के बारे में सेहो सोचु (लघुकथा) 3 Replies

अपना विवाह में बहुत राश संगी साथी के बरियाती जयबाक लेल कहलियनि , एबो केलाह , मुदा एकटा मित्र कहलाह जे जायब त लेकिन दारू पिबे टा करब । हम कहलियनि जे आहा पिबे करब आ पिब क' ताण्डव करबे करब, त' कहलाह जे…Continue

Tags: साहित्य, मैथिली

Started by SANJAY KUMAR JHA. Last reply by kanta roy Aug 11, 2015.

चरिपतिया

               (१)चाहे आहाँ रहु दिल्ली आ मुम्बई,वा रहु देश-विदेशक कोनो कोण में,मैथिल भेटिते मैथिली बाजू टन द' मिठगर बोल में ।               (२)अमावश्या राति सन मुँह हुनक द्वितिया चान सन दाँत बाजब यदि…Continue

Started by SANJAY KUMAR JHA Aug 11, 2015.

सीता माता वन्दना

तर्ज़ : जय जय भैरवि अशुर भयाऊनिजय जय सीता मिथिला तारिणी जनक धिया सुखदाईसुन्दर सुमति दिय हे मातादुःख निवारू माईजय जय सीता मिथिला तारिणी ।अति कोमल राम ह्रिदय वासिनी हनुमत के आहाँ माईरावण राक्षस मारक…Continue

Started by SANJAY KUMAR JHA Aug 10, 2015.

गीत 9 Replies

ई जे साँझ परलै मैया की हमरे जीवनमे मुनल आँखि तकबै कहिया हमरो जीवनमे।।सगर दुनियाँकेँ चिलका माएक आँचर तर हम अभागल कोना भटकै छी दर-दर।।घुरि, बुझि आबो आबू मनु अबुद्धि नेना अपन सिनेहसँ किएक बिसरलहुँ…Continue

Tags: मनु, गीत

Started by जगदानन्द झा 'मनु'. Last reply by kanta roy Aug 10, 2015.

सम्हरि जाऊ बाबू मिथिलानी जागि गेल ( लघुकथा ) 9 Replies

" यौ गाम बाबू ,सुनलियै , कि कहैत छथिन पिसी दाई । "" कि कहैत छथुन मंजूला बौआ , तोहर पिसी दाई ? "" कहै छथिन जे कतबो पढेबै बेटी के , पाई तय गनहे पडतहू । पढल लिखल बेटी देबई, हुनकर बेटा समकक्ष , तय पाई…Continue

Started by kanta roy. Last reply by kanta roy Aug 10, 2015.

की आहो रामा..... 3 Replies

की आहो रामा.....कल जोरी करै छि हे मैया..विनती हमरो सुनियौ ..की आहो रामा...मिथिला के दियौ एअहन सपूत हे जननी..२ मोन में ने छल होई ओकरा..वाणी में बल होई जकरा...की आहो रामा.....भाई के सिनेह स मोन होई…Continue

Started by pankaj jha. Last reply by kanta roy Jul 7, 2015.

रुबाइ 2 Replies

 अपन बाँहि में अहाँ के गछारि लेब हमनजरि सँ करेज में उतारि लेब हमएक बेर हँ तँ कहि कए देखिऔसगरो बाट पर आँचर पसारि देब हम Continue

Tags: अनचिन्हार

Started by ASHISH ANCHINHAR. Last reply by kanta roy Jul 7, 2015.

 
 
 

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