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Smrit Mishra
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Feb 22, 2012
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"हमको अपने साथ ले लो य हमारे साथ चलो जिंदगी कट जाएगी गर सबसे ही हँसकर मिलो I दीपक शर्मा कुल्लुवी"
Dec 29, 2011
Smrit Mishra posted a blog post

'रिश्तो का सच'

मां की ममता, पिताजी का त्याग,बहन की समझदारी, भाई का प्यार!क्या यही है रिश्तो की बुनियाद,ये रिश्ते कभी नहीं होते बेकार!माँ की ममता हमारे दुख भूलती,हमको हमेशा सही राह दिखाती!पिताजी कात्याग देता देता अनुशासन का पाठ,बनता है हमको और भी महान!बहन की समझदारी हमें हमेशा हौसला दिलाती,दुनिया के लोगो के बारे में बताती!भाई का प्यार दिलाता हर रिश्तो का ज्ञान,जिससे हम थे अभीतक अनजान!फिर हम क्यों भूल जाते हैं उनसबो को,क्यों कर देते हैं पल में पराया अपनों को!फिर हम क्यों बेगाने होकर संसार से चले जातें हैं,क्यों…See More
Sep 20, 2011
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"GO AHEAD MISHRA JI   DEEPAK"
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satish mapatpuri commented on Smrit Mishra's blog post " उलझन"
"जितना उनको खोना  है  मुश्किल,उतना उनको पाना भी है मुश्किल; कोशिश ही सफलता की कुंजी है मिश्राजी, अच्छी रचना है, दाद कबूल करें"
Sep 12, 2011

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Smrit Mishra's blog post " उलझन"
"स्मृत मिश्रा जी अच्छा प्रयास है, रचना को कुछ और कसने की जरुरत है ताकि compact effect दे | बधाई स्वीकार करे |"
Sep 12, 2011
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Sep 11, 2011
Smrit Mishra commented on Smrit Mishra's blog post "ख्वाहिसे"
"धन्यवाद, वंदना जी, यह तो आपलोगों का बड्पन है"
Sep 11, 2011

Profile Information

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Male
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Delhi
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Muzaffarpur
Profession
Director
About me
I am director of Kids Home

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'रिश्तो का सच'

मां की ममता, पिताजी का त्याग,

बहन की समझदारी, भाई का प्यार!

क्या यही है रिश्तो की बुनियाद,

ये रिश्ते कभी नहीं होते बेकार!

माँ की ममता हमारे दुख भूलती,

हमको हमेशा सही राह दिखाती!

पिताजी कात्याग देता देता अनुशासन का पाठ,

बनता है हमको और भी महान!

बहन की समझदारी हमें हमेशा हौसला दिलाती,…

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Posted on September 20, 2011 at 1:14am — 1 Comment

" उलझन"

न कोई गिला, न कोई शिकवा,

उनसे न मिलना भी है एक सजा;

न मिले हम उनसे तो दिल डूबा रहता है उनकी यादो में,

मिले अगर हम उनसे तो दिल डूबा रहता है अरमानो में;

डरते हैं हम कि कहीं हम  बह न जाएँ इन अरमानो में,

कहीं रह न जाये बस वो मेरे खयालो में;

मेरी जिंदगी में बस यही कशमकश है,

और बस यही मेरी जिंदगी की उलझन है;

जितना उनको खोना  है …

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Posted on September 11, 2011 at 10:29pm — 2 Comments

" जालिम दुनिया"

साथ रहकर भी दूर हैं हम,
उनकी मजबूरियों के कारण मजबूर हैं हम;
उनकी चाहतो  को पूरा करूँ मैं हरदम,
पर बताते भी तो हैं वो मुझको कम;
कारण ये नहीं की जुदा हैं हम उनसे,
कारण तो ये है कि डरते है हम जगसे;
जग में कहीं उनकी जग हंसाई न हो जाये,…
Continue

Posted on September 11, 2011 at 10:28pm

दिल्ली में गहराता ही जा रहा है मुसीबतों का सम्राज

दिल्ली जो कि दिलवालों कि नगरी कहलाती है उसपर एक के बाद एक मुसीबते टूटती जा रही है.

यहाँ पर गोलीबारी, लूटपाट, चोरी, अपहरण, हत्या जैसी समस्या आम हो  गयी है, जहाँ पर दिल्ली दिलवालों का शहर  हुआ करता था वही आज कल यह गुनाहों का शहर बन गया है.

जहाँ पर लोगो को घर से निकलते भी यह सोचना पड़ता  है कि वो सही सलामत घर आ भी पाएंगे कि नहीं. अगर हम किसी  भी तरह इस मानव निर्मित आपदाओ से  बच भी जाये तो प्राकृतिक आपदा भी हमारा पीछा नहीं छोडती है.

ठीक इसी प्रकार कि घटना ०७/०९/२०११ को घटी पहले तो…

Continue

Posted on September 8, 2011 at 12:36am

Comment Wall (7 comments)

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At 1:32pm on August 10, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

janmdiwas ki hardik shubhkaamnaayein....

At 10:29am on March 27, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

good shoot

At 2:28pm on December 29, 2011, Deepak Sharma Kuluvi said…
हमको अपने साथ ले लो य हमारे साथ चलो
जिंदगी कट जाएगी गर सबसे ही हँसकर मिलो I

दीपक शर्मा कुल्लुवी
At 2:52pm on September 17, 2011, Deepak Sharma Kuluvi said…

GO AHEAD MISHRA JI

 

DEEPAK

At 7:12pm on September 14, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 8:47pm on September 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 9:04am on September 4, 2011, Admin said…

 
 
 

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