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प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी (बाबा के गीत )


प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ.......

प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ

आहाँ केर नगरी सुन्दर नगरी ,कोना कय पेबई दरसन यौ
कोना -कोना कय हम निहारब ,आहाँक मुख चन्द्र यौ
छी हम बहुत अभागल आँहाँ ने भेलहुँ संग यौ.........

प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ

सर्प विचरत अंग -अंग में , बदन चन्दन लेप यौ
साथी बसहा मुड़ी झुलाबे ,गौरी मुख मुस्कान यौ
ज्युँ हम होइतहुँ सेवक आँहाँके ,  होइतहुँ हम धन्य यौ.......

प्रसाद बुझी हम पीबी रहल छी ई जीवन दुःख बाबा यौ
नाम अहाँ के रटते -रटते ,करबै जीवन अंत यौ

मौलिक और अप्रकाशित

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वाह ! बड्ड नीक लिखलहुँ...

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