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मुस्कुराना भूल आये हैं

ख़ुशी से हंसते-हंसते लब, मुस्कुराना भूल आये हैं,
आज हम अपने ही घर का, ठिकाना भूल आये हैं,


यादों के सब लम्हे , यादों से मिटाकर हम,
उसके साथ वो गुजरा, जमाना भूल आये हैं,

बुझाकर रख गई जब वो, सुहाने साथ बीते पल,
सुलगता यादों का वो पल छिन, जलाना भूल आये हैं,

लगी जब चोट हकीकत की, जग गई नींद से आँखें,
बंद आँखों पर ख्वाबों को, सजाना भूल आये हैं,

उसे खुशहाल रखना, इस दिवाने दिल की आदत थी,
अब उसकी खातिर अपने अश्क, बहाना भूल आये हैं....

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 11:26am

आदरणीया रेखा जी आपने मुझे बेटा कहा है और मैंने आपको माँ. और जब माँ बेटे की तारीफ करती है तो मन को बड़ी प्रसंता होती है.

आपको नमन

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 11:24am

आदरणीया हरीश जी आपकी बधाई स्वीकार है. आपको प्रणाम

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 11:23am

आदरणीया अलबेला जी टिपण्णी के जरिये आशीर्वाद देने के लिए शुक्रिया.

Comment by Rekha Joshi on July 10, 2012 at 1:47pm

अरुण जी 

उसे खुशहाल रखना, इस दिवाने दिल की आदत थी,
अब उसकी खातिर अपने अश्क, बहाना भूल आये हैं..,बहत सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई 
Comment by Harish Bhatt on July 10, 2012 at 1:14pm

अरूण जी नमस्‍ते, 

ख़ुशी से हंसते-हंसते लब, मुस्कुराना भूल आये हैं,
आज हम अपने ही घर का, ठिकाना भूल आये हैं,

बहुत सुंदर, हार्दिक बधाई

Comment by Albela Khatri on July 10, 2012 at 12:51pm

अच्छी ग़ज़ल कही जनाब !
वाह !

लगी जब चोट हकीकत की, जग गई नींद से आँखें,
बंद आँखों पर ख्वाबों को, सजाना भूल आये हैं,

___उम्दा !

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 8, 2012 at 5:26pm

आदरणीया रोशिनी जी बहुत-२ शुक्रिया.

Comment by Roshni Dhir on July 8, 2012 at 5:25pm

Arun ji , bahut sunder gazal kahi apne...

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 8, 2012 at 5:22pm
 
"उसके इर्द गिर्द ही जिन्दगी बसा ली हमने,
इसलिए उसके दिए गम भी है अपने |"
वाह सवी जी क्या बात है, बहुत उम्दा
शुक्रिया
Comment by savi on July 8, 2012 at 5:18pm
"उसे खुशहाल रखना, इस दिवाने दिल की आदत थी,
अब उसकी खातिर अपने अश्क, बहाना भूल आये हैं"....
 
अरुण जी, बहुत सच कहा आपने |
 
"उसके इर्द गिर्द ही जिन्दगी बसा ली हमने,
इसलिए उसके दिए गम भी है अपने |"

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