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रिमझिम बरस जाती हैं बूंदे
जब याद तुम्हारी आती है ।
बिन मौसम ही मेरे घर में
वो बरसात ले आती है ।
जब पड़ी मेह की बूंदे
मुस्कुराते उन फूलों पर
हर्षित फूलों पर वो बूंदे
तेरा चेहरा दिखाती है ।
नाता तो गहरा है
इन बूंदो का तुझसे
चाहे तेरी याद हो या
ये बरसात हो मुझे तो 
दोनों भिगो जाती हैं ।

- दीप्ति शर्मा

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Comment by deepti sharma on July 22, 2012 at 7:50pm

आदरणीय प्रवीण कुमार जी बहुत बहुत आभार आपका

Comment by प्रवीण कुमार श्रीवास्तव on July 21, 2012 at 1:10am

सुन्दर रचना, खासतौर से
हर्षित फूलों पर वो बूंदे
तेरा चेहरा दिखाती है
पंक्तियाँ सराहनीय हैं.

Comment by deepti sharma on July 21, 2012 at 12:20am
आदरणीय सौरभ जी बहुत बहुत शुक्रिया ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 12, 2012 at 12:08am

अभिव्यक्ति बहुत सहज है और अर्थ सापेक्ष.  भावनाएँ ही ऋतुओं के होने का अर्थ हैं.  इस भावपगी रचना के लिये धन्यवाद.

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 8:14pm

आदरणीय अरुण जी  , आपका बहुत बहुत आभार आपको कविता पसंद आयी

Comment by Arun Sri on July 11, 2012 at 8:08pm

बहुत कोमल एहसासों को शब्द दिए आपने ! बहुत बढ़िया !

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:58pm

आदरणीय संदीप  जी  , आपका बहुत बहुत आभार आपको कविता पसंद आयी

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 11, 2012 at 7:45pm

वर्षा के क्षणों में महसूस किये गए लम्हों का सुन्दर चित्रण किया आपने| बढ़ाई दीप्ति जी!

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:02pm

आदरणीया रेखा जोशी  जी , आपका बहुत बहुत आभार अपना आशीष यूँ ही बनाये रखियेगा

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:02pm

आदरणीय अलबेला खत्री जी  , आपका बहुत बहुत आभार अपना आशीष यूँ ही बनाये रखियेगा 

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