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सब रह जाएगा

कहीं किडनी फेल कहीं हार्ट फेल
कुदरत के हैं यह अजीब खेल
कर्म किए हैं तूने जैसे
वैसी ही अब सज़ा तू झेल
भूल गया था तू औकात
कुछ भी तुझको रहा न याद
बहुत हँसा अब रोएगा तू
कौन सुने तेरी फरियाद
वोह ऊपर बैठा सब देखे है
कर्मों के ही सब लेखे हैं
इंसाफ़ करेगा वोह तो ज़रूर
मिटा के रहेगा तेरा गरूर
जीवन में चाहे कुछ भी करना
किसी के हक से घर न भरना
धन दौलत यहीं रह जाएगा
अपनी हस्ती पे गुमाँ न करना

दीपक 'कुल्लुवी'
13/07/12
9350078399

Views: 420

Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on July 30, 2012 at 11:02am

shukriya bharamar ji ,albela ji

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 13, 2012 at 11:27pm

बहुत हँसा अब रोएगा तू 
कौन सुने तेरी फरियाद
वोह ऊपर बैठा सब देखे है
कर्मों के ही सब लेखे हैं
इंसाफ़ करेगा वोह तो ज़रूर
मिटा के रहेगा तेरा गरूर 

प्रिय दीपक जी  सुन्दर सन्देश ...प्यारी  रचना ..गुरुर टूटना बहुत जरुरी भी होता है 

भ्रमर ५ 

 

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 6:06pm

क्या कहने दीपक कुल्लुवी जी......
बहुत सुन्दर रचना ........
बधाई !

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on July 13, 2012 at 4:15pm

शुक्रिया पटेल जी,श्रीवास्तव जी ........

मेरे गम से न रख रिश्ता
मगर अपना मुझे दे दे
अपने दर्द के लम्हे
हमारे नाम तू कर दे
.................
दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 3:42pm

वाह वाह आदरणीय दीपक जी
कम शब्दों में सुन्दर बातें कह डालीं हैं आपने
नमन सहित बधाई आपको इस लेखन के लिए

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 3:38pm

वाह वाह वाह ........इतनी छोटी से रचना में इतना सब कुछ कह डाला आपने ........बधाई है बधाई ......

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