For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीया/आदरणीय गुरुमां, गुरुजनों और मेरे प्रिय मित्रों. आज पहली बार मैंने ओ.बी.ओ पर ग़ज़ल की कक्षा से सीख कर एक ग़ज़ल लिखने का प्रयास किया है. कृप्या मेरा मार्ग दर्शन करें कि मैंने कहाँ पर त्रुटी की है. सभी को सादर प्रणाम.

दो घूंट भरके पी ले, बड़ी उम्दा शराब है,
ए दोस्त तेरी प्यार में किस्मत ख़राब है,

धोखा है, बेवफा है, ये हुस्न है फरेबी,
मोहोब्बत भरे दिलों को, लूटे शबाब है, 

तोहमत लगाओ चाहे,चाहे करो सवाल,
मिलता नहीं पलट कर, कभी कोई जवाब है,

बेचैनी बेवजह,उलझन भी मिली तबसे,
जबसे हुई है चोरी, दिल की किताब है,

रवां हो भी नहीं पाता है, की इतनी जल्दी,
पलकों की पंखुड़ियों से टूट जाता ख्वाब है......

Views: 526

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 18, 2012 at 11:14am

आदरणीया बहुत बहुत शुक्रिया.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 18, 2012 at 9:48am

बहुत अच्छा प्रयास है 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 15, 2012 at 1:53pm

भ्राताश्री अम्बरीश जी,
बहुत - बहुत शुक्रिया, आपने मार्गदर्शन किया. आपका आशीर्वाद और स्नेह यूँ ही बना रहा तो जरुर ये कमियां दूर हो जायेंगी.

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 15, 2012 at 1:49pm

अरुन भाई प्रसंशा के लिए आभार

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 15, 2012 at 1:49pm

भ्रमर जी बहुत - बहुत शुक्रिया.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 14, 2012 at 11:12pm

भाई अरुण जी ,  बेहतर प्रयास किया है आपने ! बहुत-बहुत बधाई | इसी तरह अभ्यास करें तो बहुत जल्द ही उम्दा गज़ल कहने लगेंगे.......

गज़ल में सुधार हेतु आवश्यक सुझाव.....

इस गज़ल की बह्र  है

मफईलु  फाइलातु मफाईलु फाइलुन

२२१      २१ २१    १२२१    २१२

 

अब अपने मतले की तकतई  देखें....

२ २ १ /        २१२१ /       १२२१/      २१२/

दो घूंट/ भरके पी ले/, बड़ी उम्दा श/राब है,                                         

२१ /   २१२१ /           १२२१       /२१२

दोस्त/ तेरी प्यार/ में किस्मत ख़/ राब है,//


शेर का सुधरा रूप यह रहा .....

२२१/    २१२१/     १२२१/    २१२

दो घूंट/ भरके पी ले/, ये उम्दा श/राब है,

२२१/      २१२१/     १२२१/    २१२

ऐ दोस्त/ तेरी प्यार/  में किस्मत ख़/राब है,

 

इस मतले के शेर से आपका काफिया शराब व ख़राब का कामन भाग अर्थात 'राब' निर्धारित हो गया है| परन्तु अगले शेर मे आपका काफिया 'आब' है| जो कि दोषयुक्त ही हुआ न ... ठीक इसी प्रकार शेष अशआर को चेक करें व दोष स्वयं ढूँढें व अभ्यास करें .......

नोट : वज्न जानने के लिए उच्चारण में लगने वाले समय के अनुसार १ या २ निर्धारित किया जाता है .....

सस्नेह

Comment by Arun Sri on July 14, 2012 at 8:46pm

बेचैनी बेवजह,उलझन भी मिली तबसे,
जबसे हुई है चोरी, दिल की किताब है, ...... उम्दा ख्याल है सर जी ! प्रयास करते रहें !

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 14, 2012 at 7:31pm

बेचैनी बेवजह,उलझन भी मिली तबसे, 
जबसे हुई है चोरी, दिल की किताब है, 

, 

प्रिय अनन्त जी सुन्दर गजल .........गजल के गुणी लोग जरुर आप का मार्ग दर्शन करेंगे ..लेकिन पहली गजल में कुछ बाधा नजर आ रही है ...
कृपया, त्रुटि, मोहब्बत , पर भी नजर डालें 
हरी ओउम 
भ्रमर ५ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service