For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम भीतर तक भर जाओगे बाबाजी

मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी

रोते रोते आये  जैसे दुनिया में
वैसे ही तुम घर जाओगे बाबाजी

बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी

पल दो पल भी अगर प्रभु को याद किया
भवसागर से तर जाओगे बाबाजी

कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी

प्यार किसी प्राणी से कर के तो देखो
तुम भीतर तक भर जाओगे बाबाजी

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी

'अलबेला' चुपचाप निकल लो महफ़िल से
वरना दिन भर सर खाओगे बाबाजी 

-अलबेला खत्री

Views: 691

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by वीनस केसरी on July 22, 2012 at 9:24pm

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी

वाह वाह वा
क्या कहने बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 8:17pm

धन्यवाद  दीप्ति  जी

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 8:12pm

आदरणीय उमाशंकर जी............
आपका प्यार  पा कर  मज़ा आ जाता है
___सादर

Comment by deepti sharma on July 22, 2012 at 8:06pm

बिलकुल सही कहा आपने 

मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी

सुंदर रचना  

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 22, 2012 at 4:36pm

आपका स्वागत है ...

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 22, 2012 at 4:32pm

जो समझे हैं सार गजब इन ग़ज़लों का

वो तो सागर पार हो गया बाबा जी

छोटी छोटी गूढ़ बात है बाबा जी

दिल में करती गहरा घात है बाबा जी

जय हो ....अलबेला जी की

Comment by Albela Khatri on July 22, 2012 at 3:33pm

धन्यवाद
बहुत बहुत धन्यवाद अम्बर जी...........
आपने सराह दिया ...
अपना काम हो गया
__सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 22, 2012 at 2:53pm

//बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी

कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी

बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी//

उपयोगी हर बात कही है अलबेला.

अपनाओ तो तर जाओगे बाबा जी :-)

वाह आदरणीय अलबेला जी वाह! इन अशआर के माध्यम से क्या सार्थक सन्देश दिए हैं आपने ......! बहुत-बहुत बधाई आदरणीय !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
41 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"प्रस्तुत रचना को रूपमाला छंद पर लिखा गया है। इस छंद के प्रयोग और विधान का जितना मुझे पता लग सका उसे…"
17 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
17 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
17 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
18 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday
Admin posted discussions
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service