मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी
रोते रोते आये जैसे दुनिया में
वैसे ही तुम घर जाओगे बाबाजी
बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी
पल दो पल भी अगर प्रभु को याद किया
भवसागर से तर जाओगे बाबाजी
कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी
प्यार किसी प्राणी से कर के तो देखो
तुम भीतर तक भर जाओगे बाबाजी
बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी
'अलबेला' चुपचाप निकल लो महफ़िल से
वरना दिन भर सर खाओगे बाबाजी
-अलबेला खत्री
Comment
बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी
वाह वाह वा
क्या कहने बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है
धन्यवाद दीप्ति जी
आदरणीय उमाशंकर जी............
आपका प्यार पा कर मज़ा आ जाता है
___सादर
बिलकुल सही कहा आपने
मेहनत से यदि डर जाओगे बाबाजी
जीवन में क्या कर पाओगे बाबाजी
सुंदर रचना
आपका स्वागत है ...
जो समझे हैं सार गजब इन ग़ज़लों का
वो तो सागर पार हो गया बाबा जी
छोटी छोटी गूढ़ बात है बाबा जी
दिल में करती गहरा घात है बाबा जी
जय हो ....अलबेला जी की
धन्यवाद
बहुत बहुत धन्यवाद अम्बर जी...........
आपने सराह दिया ...
अपना काम हो गया
__सादर
//बाइक पर मोबाइल से मत बात करो
गिर जाओगे, मर जाओगे बाबाजी
कारें कितनी भी हों, काम न आएँगी
आखिर कान्धों पर जाओगे बाबाजी
बच्चों की माँ धो डालेगी बेलन से
मदिरा पी कर गर जाओगे बाबाजी//
उपयोगी हर बात कही है अलबेला.
अपनाओ तो तर जाओगे बाबा जी :-)
वाह आदरणीय अलबेला जी वाह! इन अशआर के माध्यम से क्या सार्थक सन्देश दिए हैं आपने ......! बहुत-बहुत बधाई आदरणीय !
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