For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

महल-अटारी

महल-अटारी
या गाय दुधारी
सम्मोहन है
खूबसूरती का
अहा
ब्यूटीफुल
वाह
काश !!!!!!
फूलते पिचकते सीने
आह
दो कौड़ी के एक कमरे के फ्लैट
ताव देखो महलों वाले
भीरु हो या भोले भाले
काले हो सर्प हो काले
.
.
.
चौंधिया जाती हैं आँखें
एक बत्ती कनेक्शन से
तो फिर उस पीलपाया के सामने
क्या होगा, जहां हजारों बल्ब
एक साथ तड़ित, उजाला दे रहे हैं
बौरा जाओगे भैया
हाई-फाई साउंड में करोगे ताता थैया
बौरा जाओगे भैया
महल देख के
कमरा तलाशो एक कमरा
किराया हो जिसका १००० रुपैया
बौरा जाओगे भैया
.
.
.
.
मत देखो उस ओर
मन नहीं मान रहा न
अच्छा देख लो
घरवाली की याद सताती होगी
सोचो ये न हो तो कितना मुश्किल हो
तुम जैसे लोगों का जीना
और लोग कहते हैं पोस्टर है
पोस्टर है
मन नहीं मान रहा न
ये देखो
नाम क्या है
और काम क्या हो रहा है
नज़र हटा लो अब हो गया हो तो
देख लिया
अरे इनसे अच्छे तो हमारे भील लोग
कम से कम
पत्ता तो सब जगह होता ही है
छी, छी छी
क्या अन्दर जाइएगा अब
देख भी रहे हो
मजा भी ले लिए
और अब ये भी
छी, छी छी
.
.
.
.
डरो नहीं आदमी हैं
दानव नहीं है
गेंडे जैसे हैं
वैसे रखे तो डराने के लिए ही हैं
अब नहीं तो कोई भी हिसाब न मांग लेगा
डरते हैं सब
हाँथ में देखा नहीं
बड़ी वाली बन्दूक है
दो नाली
और इनका होता है भेजा खाली
बकबास करना मत
देना मत कभी गाली
किस्मत की बात है
भगवान् हमें भी थोडा शरीर दे देता
तो मुफ्त में शरीर देख लेते
हाथ में दुनाली पकडे
.
.
.
कितने लोग है
विशाल है महल
वो देखो
उमंग नहीं दिखती
उस गुम्बद में
देखा
सूरज की किरणों की विश्राम स्थली
रिस रही है जिससे ताकत
महल परिचय नहीं देता
स्वयं परिचय होता है
ताकत का
.
.
.
जमीन बुरी है
नहीं अच्छी है
बचपन गुजार दिया माँ की गोद में
अब बड़े हो गए हैं
आसमान पे जायेंगे
कब तक खेलेंगे माँ की गोद में
और कब तक खिलाएगी वो
ले ठूंस ले
आज यही है
निठल्लू
मैंने तो सोच लिया है
रावन बनूँगा
.
.
.
रावन जानते हो न
हाँ हाँ
महल अटारी
 

संदीप पटेल "दीप"

Views: 384

Facebook

You Might Be Interested In ...

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rekha Joshi on July 26, 2012 at 10:29pm


सदीप जी 
कितने लोग है 
विशाल है महल 
वो देखो 
उमंग नहीं दिखती 
उस गुम्बद में 
देखा 
सूरज की किरणों की विश्राम स्थली 
रिस रही है जिससे ताकत 
महल परिचय नहीं देता 
स्वयं परिचय होता है 
ताकत का ,बेहद खुबसूरत रचना है महल अटारी ,बहुत बहुत बधाई 

Comment by Albela Khatri on July 26, 2012 at 9:41pm

बहुत बारीक काम करते हो भाई  संदीप जी........
__क्या बात है.....
जय हो !

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 26, 2012 at 4:56pm

बचपन गुजार दिया माँ की गोद में 
अब बड़े हो गए हैं 
आसमान पे जायेंगे 
कब तक खेलेंगे माँ की गोद में 
और कब तक खिलाएगी वो 
ले ठूंस ले 
आज यही है 
निठल्लू 

संदीप जी ..कुछ अलग सी रचना बिभिन्न रंग समाज के  दिखे ..चेतावनी जारी हुयी ...सावधानी का संकेत ...भाव भरी रचना अच्छी लगी 

जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service