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जिन्दा हूँ मुझमे अगर तुम हो

साँसों पे छाई खबर तुम हो,

मेरी आँखों की नज़र तुम हो,

 

हंसा हूँ पाकर साथ तुम्हारा,

खुशियों में होता असर तुम हो,

 

मर जाऊँगा मैं भूल ना जाना,

जिन्दा हूँ मुझमे अगर तुम हो,

 

पाके इतना मदहोश हूँ तुमको,

मेरे सपनों का नगर तुम हो,

 

लाऊँगा तारे फलक से मैं,

तुम्ही जां मेरी जिगर तुम हो........

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Comment by अरुन 'अनन्त' on August 8, 2012 at 12:20pm

आदरणीय डॉ. साहब आप जैसे महान ग़ज़ल कार को मेरी ग़ज़ल पसंद आई, तहे दिल से शुक्रिया सर

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on August 6, 2012 at 7:30am

अरुण जी बहुत सुंदर ग़ज़ल ...हर शेर से दर्द झलक रहा है। बहुत बहुत बधाइयाँ !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 5, 2012 at 3:14pm

आदरणीय सतीश जी आपको पसंद आई , तहे दिल से शुक्रिया

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 5, 2012 at 3:13pm

आदरणीया रेखा माँ आपकी टिप्पणियों से मुझे लिखने का उत्साह और बल मिलता है. आपका बहुत-२ धन्यवाद....

Comment by satish mapatpuri on August 4, 2012 at 1:07am

बहुत खूब अरुण जी , बधाई

Comment by Rekha Joshi on August 3, 2012 at 7:27pm

हंसा हूँ पाकर साथ तुम्हारा,

खुशियों में होता असर तुम हो,,बेहद खूबसूरत कविता पर बहुत बहुत बधाई बेटा अरुण ,जीते रहो  

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