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राह वो पगली बदलती नहीं

आह जो दिल से मेरे निकलती नहीं,
राह वो पगली शायद बदलती नहीं,

रोज़ मरता हूँ, जीता हूँ कभी-कभी,
हाल देख कर भी थोडा पिघलती नहीं,

खो गई पाकर, तुमको जिंदगी कहीं,
आज कल तबियत भी तो मचलती नहीं,

रूबरू आँखों में है, चेहरा तिरा,
अश्क बहते हैं, पर वो मसलती नहीं,

बात आती थी सारी, याद रात भर,
सांस सीने में रुकी, टहलती नहीं.......

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on August 8, 2012 at 12:20pm

शुक्रिया वीनस भाई

Comment by वीनस केसरी on August 4, 2012 at 1:02am

बहुत खूब अन्नत साहब

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:20am

आदरणीय भ्रमर जी सराहने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया.... ये दो पंक्तियाँ मुझे भी खटक रही हैं.

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:19am

अलबेला साहब बहुत-२ शुक्रिया......

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:19am

आदरणीया रेखा माँ आपको पसंद आई बड़ी प्रसंता हुई, आभार......

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 2, 2012 at 5:29pm

आह जो दिल से मेरे निकलती नहीं, 
राह वो पगली शायद बदलती नहीं, 

रोज़ मरता हूँ, जीता हूँ कभी-कभी, 
हाल देख कर भी थोडा पिघलती नहीं, 

प्रिय अरुण जी बहुत सुन्दर जज्बात काश वे भी समझ जाएँ हाले दिल ......

जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 
रूबरू आँखों में है, चेहरा तिरा, 
अश्क बहते हैं, पर वो मसलती नहीं, 
 
ये ऊपर की पंक्ति कुछ स्पष्ट नहीं हो सकी 

 

 

Comment by Albela Khatri on August 1, 2012 at 11:29pm

kya baat hai

Comment by Rekha Joshi on August 1, 2012 at 8:49pm

रोज़ मरता हूँ, जीता हूँ कभी-कभी, 
हाल देख कर भी थोडा पिघलती नहीं, अरुण बेटा जीने के साथ थोड़ी ख़ुशी भी ले लो ,सुंदर अभिव्यक्ति 

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