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तृष्णा की कोख से जन्मा
वासनाओं के साये में पला
एक मनोभाव है दुःख ;
सांसारिक माया से भ्रमित
षटरिपुओं से पराजित
अंतस की करुण पुकार है दुःख ;
स्वार्थ का प्रियतम
घृणा का सहचर
भोगलिप्सा की परछाई है दुःख ;
वैमनस्य का मूल्य
भेदभाव का परिणाम
आलस्य का पारितोषिक है दुःख ;
अधर्म से सिंचित
अमानवीय कृत्यों की
एक निशानी है दुःख ;
कलुषित मन की
कुटिल चालों का
सम्मानित अतिथि है दुःख ;
निरर्थक संशय से उपजी
मानसिक स्थिति का
एक नाम है दुःख |

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Comment

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Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 8, 2012 at 6:38pm

रचना पसंद करने के लिए आपका आभार अरुण शर्मा जी........

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 8, 2012 at 11:54am

बहुत ही सुन्दर रचना गौरव जी बधाई

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 7, 2012 at 11:04am

आदरणीय अम्बरीश सर.....प्रशंसा के लिए आपका दिल से आभार.......

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 7, 2012 at 1:36am

//स्वार्थ का प्रियतम
घृणा का सहचर
भोगलिप्सा की परछाई है दुःख ;
वैमनस्य का मूल्य
भेदभाव का परिणाम
आलस्य का पारितोषिक है दुःख ;//

वाह कुमार गौरव जी वाह ......इस कविता के माध्यम से आपने दुःख को बहुत ही यथार्थ रूप में परिभाषित किया है ....साधुवाद मित्र ....सस्नेह ....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:54pm

आदरणीय रक्ताले सर.......आपकी प्रेमपूर्ण प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी.......स्नेह बनाये रखियेगा.......आभार.......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:52pm

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय योगी जी......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:51pm

हमेशा की तरह उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद आदरणीया रेखा जी.....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:48pm

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण सर......आपने बिलकुल सही कहा कि सुख एक मृग तृष्णा है....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:46pm

स्वागत है संदीप जी........आपका हार्दिक आभार मित्रवर.......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 6, 2012 at 10:45pm

हार्दिक आभार आदरणीय सूर्या जी............आपका प्यार हमेशा मेरा उत्साहवर्धन करता है.......

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