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कह मुकरी: मोहपाश में नित्य फँसाये!

कह-मुकरी

(1)

पल में सारा गणित लगाये 

इन्टरनेट पर फिल्म दिखाये 

मेरे बच्चों का वह ट्यूटर.

ऐ सखि साजन? नहिं कम्प्यूटर..

(2)

बड़ों-बड़ों के होश उड़ाये

अंग लगे अति शोभा पाये

डरती जिससे दुनिया सारी

क्या वो नारी? नहीं कटारी!! 

(3)

रहे मौन पर साथ निभाये

मैडम का हर हुक्म बजाये 

नहीं आत्मा रहता बेमन 

ऐ सखि रोबट? नहिं मन मोहन!!

(4)

मोहपाश में नित्य फँसाये

सास-बहू हैं घात लगाये

उलझी जिसमें रहती बीवी

सोना चांदी? नहिं यह टीवी!!

(5)

जंतर-मंतर धूम मचाये

भ्रष्ट तंत्र को राह दिखाये   

चली जोर से  जिसकी आँधी

क्या सखि अन्ना? नहिं सखि गाँधी!!

--अम्बरीष श्रीवास्तव

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Comment

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Comment by Rekha Joshi on August 8, 2012 at 10:34am

 आदरणीय अम्बरीश जी ,सादर नमस्ते 

रहे मौन पर साथ निभाये

मैडम का हर हुक्म बजाये 

नहीं आत्मा रहता बेमन 

ऐ सखि रोबट? नहिं मन मोहन!!.बहुत बढ़िया ,सटीक  कह मुकरी ,मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें 

Comment by Yogi Saraswat on August 8, 2012 at 9:50am

मोहपाश में नित्य फँसाये

सास-बहू हैं घात लगाये

उलझी जिसमें रहती बीवी

सोना चांदी? नहिं यह टीवी!!

बहुत सही लिखा आपने श्रीवास्तव जी ! आइना दिखा दिया ! बहुत बढ़िया

Comment by UMASHANKER MISHRA on August 7, 2012 at 10:19pm

प्रिय अम्बरीश जी कह मुकरियाँ मन मोह रही है

रहे मौन पर साथ निभाये

मैडम का हर हुक्म बजाये 

नहीं आत्मा रहता बेमन 

ऐ सखि रोबट? नहिं मन मोहन!!

जंतर-मंतर धूम मचाये

भ्रष्ट तंत्र को राह दिखाये   

चली जोर से  जिसकी आँधी

क्या सखि अन्ना? नहिं सखि गाँधी!! ये दो मुकरियाँ एकदम लाजवाब है मज़ा आ गया

मुझसे ज्यादा मेरे बच्चो को आपकी इन मुकरियों को पढ़ आनंद आता है  वे इन्हें अपनी कापी में उतार  लेती है

हर प्रश्न का  सटीक जवाब दिया है

बहुत बहुत बधाई

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 7, 2012 at 7:45pm

आदरणीय अम्बरीश जी सादर नमन, कह मुकरिया में खास तौर से ४ नंबर घर घर की सच्ची कहानी बयाँ करती है | पसंद आई |

आन्दोलन अगर सफल हुआऔर आंधी चली तो गाँधी की, इसलिए बिलकुल उचित ही लिखा है- हार्दिक बधाई 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 7, 2012 at 4:21pm

जय श्री राधे बहुत सुन्दर ..हाजिर जबाबी की आप के जबाब नहीं .....

भ्रमर ५ 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 7, 2012 at 3:35pm

स्वागत है आदरणीय भ्रमर जी, कह मुकरियों की सराहना के लिए हार्दिक आभार ......भाई जी मेहनत करना ही तो अपना धर्मं है ! और मैंने भी तो कुछ देर पहले यहाँ पर http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:256771 मेहनत ही की है ........सादर 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 7, 2012 at 2:53pm

बड़ों-बड़ों के होश उड़ाये

अंग लगे अति शोभा पाये

डरती जिससे दुनिया सारी

क्या वो नारी? नहीं कटारी!! 

आदरणीय अम्बरीश जी बहुत सुन्दर कह मुकरियाँ आप की हर रंग दिखाती हुयी टी वी कंप्यूटर अन्ना गांधी सब ...उपर्युक्त बहुत अच्छी लगी 

ऐ सखि रोबट? नहिं मन मोहन!! 
क्या सखि अन्ना? नहिं सखि  गाँधी!! 
ये दोनों समझने में बड़ी मेहनत लग रही है ..काश समझ  जाऊं 
भ्रमर ५ 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 7, 2012 at 12:15pm

पिसाई तो होनी ही है भाई कुमार अजीतेंदु जी, क्योंकि 'मन' को काबू में करने वाले ही तो महामानव कहलाते हैं .....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 7, 2012 at 12:09pm
आदरणीय अम्बरीश सर, सही कहा आपने। इस बेचारे मोहन की तो पिसाई ही हो रही है।
Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 7, 2012 at 11:29am

सुप्रभात आदरणीय प्रदीप जी, हार्दिक आभार मित्रवर .....

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