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आता है हर साल मेरे राह में गुजर

शहिदों की यादें लिए त्यौहार को नमन

वो तो चले गये जो सदा रहेंगें अमर

उनके खूँ के गर्मी के उपकार को नमन

सम्हालना था जिन्हें इस देश की डगर

जाने कहाँ खो गये उनका भी हो नमन

लूटने वालों ने थामा है  अपना हाथ

निष्ठुर तमाशा देखती हर आँख को नमन

झंडे में पड़ा ये फहरने को था मगर

खींचते नेता के हाथों फंद को नमन

इंतज़ार कब पड़ेंगे इस देश में चरण

उस कृष्ण और राम के अवतार को नमन

सजदे में मेरे है हर गांव और शहर

देश की मिटटी के हर एक बुत को नमन

खींचते हैं आम यहाँ द्रोपदी के चीर

लाचार देश के सभी लाचार को नमन

कुर्बानियों की याद में आज़ाद ए वतन

बस एक दिन उत्साह फिर खल्लास को नमन

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना

उमाशंकर मिश्रा

दुर्ग (छ.ग.)

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Comment by PHOOL SINGH on November 12, 2012 at 1:20pm

उमा शंकर जी प्रणाम.......

सुंदर अतिसुंदर भावपूर्ण गजल ......"सपरिवार सहित आपको शुभ दीपावली"

फूल सिंह

Comment by UMASHANKER MISHRA on August 15, 2012 at 9:00pm

आदरणीया रेखा जी आपने मेरी अंतरात्मा से निकली लाईन को कोड किया

आपके इस सटीक टिप्पणी के लिए आभार

Comment by UMASHANKER MISHRA on August 15, 2012 at 8:58pm

महिमा जी आपने जज्बातों को समझा

आपका आभार

Comment by Rekha Joshi on August 15, 2012 at 6:38pm

स्टीक व्यंग आदरणीय उमाशंकर जी ,बधाई 

Comment by Rekha Joshi on August 15, 2012 at 6:36pm

कुर्बानियों की याद में आज़ाद ए वतन

बस एक दिन उत्साह फिर खल्लास को नमन

Comment by MAHIMA SHREE on August 15, 2012 at 6:04pm

देश के हालात पर बढ़िया व्यंग ... सच्चाई तो यही है .. एक दिन बड़े बड़े वादे किये जाते है .. चिंता जताई जाती है .. और फिर  स्थिति वही की वही ...

बधाई आपको

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