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जब भी आती है याद तुम्हारी

जब भी आती है याद तुम्हारी,
पलट लेता हूँ डायरी के पन्ने को,
और पढ़ लेता हूँ
उन तारीखों का वर्तमान
और सोचता हूँ
काश!
जिन्दगी भी पलट जाती,
यूं ही उन तारीखों तक............../

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 22, 2012 at 8:57pm

भावनात्मक शब्दों को प्रस्तुत करने हेतु आभार |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 21, 2012 at 11:16pm

बहुत सुन्दर ! .. इस भावाभिव्यक्ति के लिये बधाई. 

बने रहें, पुष्यमित्रजी.

Comment by Albela Khatri on August 21, 2012 at 10:11pm

Comment by Pushyamitra Upadhyay on August 21, 2012 at 10:09pm

naval ji, rajesh ji, albela ji.

aap sabhi le comments paakar abhibhut hoon...

yu hi aashish bnaaye rakhiye.... :)

Comment by Albela Khatri on August 21, 2012 at 9:10pm

वाह पुष्यमित्र उपाध्याय जी वाह

उन तारीखों का वर्तमान

क्या कहने,,,,,,,,,

सुन्दर कविता के लिए  अभिनन्दन !

Comment by राजेश 'मृदु' on August 21, 2012 at 6:11pm

बहुत सुंदर

Comment by Naval Kishor Soni on August 21, 2012 at 1:00pm

congratulation ji

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