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मुझ पर एक एहसान करो

 

मुझ पर एक एहसान करो

ढंग से अपना कर्म करो

अलख ज्योति जला के हृदय

नवीन युग का निर्माण करो

मुझ पर एक एहसान करो

 

आँधियों को भी चलने दो

जख्मो को भी बनने दो            

जूझते रहो हर समस्या से

जब तक ना इसका

समूल विनाश करो

मुझ पर एक एहसान करो

 

निपुण स्वयं को इतना करो

कथन करनी में भेद ना हो

स्र्मृति चिन्ह बने तेरे कदम

आयाम ऐसे खड़े करो

मुझ पर एक एहसान करो

 

बहुमूल्य ये जीवन है

बड़े पुण्यों का है सरगम

कृत्य ऐसे करते चलो

मानव धर्म पर बढ़ते चलो

मुझ पर एक एहसान करो

 

संकल्प ऐसे हृदय धरो

सामाजिक बुराइयों का अंत करो

समर्पित धरती माँ को जीवन कर

अपने दायित्व की पूर्ति करो

मुझ पर ये एहसान करो

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Comment

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Comment by PHOOL SINGH on August 28, 2012 at 12:32pm

दीपक शर्मा   जी  नमस्कार

आपका मेरे ब्लॉग सुस्वागत ...........ये मेरा सौभाग्य की मेरी रचना आपको अच्छी लगी ............इसके लिए आपको सहृदय से धन्यवाद

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on August 28, 2012 at 12:31pm

अशोक  जी  नमस्कार

आपका मेरे ब्लॉग सुस्वागत ...........ये मेरा सौभाग्य की मेरी रचना आपको अच्छी लगी ............इसके लिए आपको सहृदय से धन्यवाद

फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on August 28, 2012 at 12:31pm

 नवल किशोर जी नमस्कार आपका मेरे ब्लॉग सुस्वागत ...........ये मेरा सौभाग्य की मेरी रचना आपको अच्छी लगी ............इसके लिए आपको सहृदय से धन्यवाद फूल सिंह

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 24, 2012 at 11:03pm

आदरणीय

               सादर,

मुझ पर एक एहसान करो

मन  से अपना काम करो

अलख  जला इस हृदय में

नवीन युग का निर्माण करो

मुझ पर एक एहसान करो.......

थोड़े सुधार से गेयता और भी अच्छी बनेगी. विकासशील विचारों के लिए हार्दिक बधाई.

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on August 23, 2012 at 2:14pm

CONGRATULATION.....PHOOL SINGH

पहली रचना के प्रकाशन के लिए मुबारकबाद यहाँ तक का रास्ता हमने दिखाया ज़रूर है पर आगे आपकी अपनी  मेहनत है...

 

दीपक कुल्लुवी 

Comment by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 11:43am

आदरणीय फूल सिंह जी ,बधाई-------

Comment by Rekha Joshi on August 23, 2012 at 11:30am

संकल्प ऐसे हृदय धरो

सामाजिक बुराइयों का अंत करो

समर्पित धरती माँ को जीवन कर

अपने दायित्व की पूर्ति करो

मुझ पर ये एहसान करो,अति सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीय फूल सिंह जी ,बधाई 

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