For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कठिन काल के आवेगों से,कभी नहीं बच पाओगे,
परिवर्तन ही सत्य जगत का,सच को कहा छुपाओगे।
लौह सदृश इस सुगढ़ देह को,देख नहीं इतराओ तुम,
जब आयेगी काल की आंधी,तिनके सम उड़ जाओगे॥

ध्वस्त हुआ रावण का सपना,जो त्रैलोक्य विजेता था,
अस्त हुआ साम्राज्य ब्रिटिश का,अस्त सूर्य ना होता था।
मिटा सिकंदर विश्व विजेता,नेपोलियन बर्बाद हुआ,
अहंकार यदि नष्ट हुआ ना,मिट्टी में मिल जाओगे॥

ईश अंश श्रीराम कृष्ण भी,छोड़ धरा को चले गये,
कालजयी वो भीष्म पितामह,शर-शैय्या से बिंधे गये।
दस सहस्र गज सम बल वाला,भीम काल में समा गया,
ईश नहीं जब बचे काल से,कहो कहां बच पाओगे॥

Views: 494

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by seema agrawal on September 6, 2012 at 1:24am

बहुत  सुन्दर रचना विन्धेश्वरी भाई 

कठिन काल के आवेगों से,कभी नहीं बच पाओगे,
परिवर्तन ही सत्य जगत का,सच को कहा छुपाओगे।.......वाह सत्य को स्मरण रखने का सुन्दर आह्वान 

लौह सदृश इस सुगढ़ देह को,देख नहीं इतराओ तुम,
जब आयेगी काल की आंधी,तिनके सम उड़ जाओगे॥..........बहुत खूब निश्चित नियती के प्रति चेताती पंक्तियाँ 


अहंकार यदि नष्ट हुआ ना,मिट्टी में मिल जाओगे॥............वाह बहुत ही सादगी से कही गयी सच्ची बात 

ईश नहीं जब बचे काल से,कहो कहां बच पाओगे॥.............बहुत बढ़िया गीत के लिए हृदय से बधाई और शुभकामनाएं 

Comment by Ashok Kumar Raktale on September 1, 2012 at 8:15am

ध्वस्त हुआ रावण का सपना,जो त्रैलोक्य विजेता था,
अस्त हुआ साम्राज्य ब्रिटिश का,अस्त सूर्य ना होता था।

वाह! बहुत जोश जगाती रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on August 31, 2012 at 8:12pm
हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी!
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 31, 2012 at 11:39am

काल का आवेग (गीत) अति सुन्दर यथार्थ, सत्य को उजागर करती और अच्छा सन्देश देता गीत बहुत बधाई  भाई श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
16 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
17 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
17 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
17 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
17 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
17 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
17 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
21 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
22 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service