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जिसमे राष्ट्रिय मान  भी  हो!

दूजों के प्रति सम्मान  भी हो!

अभिमान नही किंचित मन में,

पर दृढ़मय स्वाभिमान भी हो!

 

वाणी  से  केवल सत्य कहे!

जो सत्य हेतु  हर कष्ट सहे!

निर्बल का जो बल बन जाए!

परदुख से जिसके  नैन  बहें!

उस अदृश्य को ही मैंने, मन समर्पित कर दिया है!

हाँ  वही  मेरी  प्रिया  है, हाँ  वही  मेरी प्रिया है!

 

जो  अत्याचार  विरोधी  हो!

अन्याय-राह   अवरोधी  हो!

पथभ्रष्ट जनों की खातिर तो,

सत्पथ-दायक  सम्बोधी  हो!

 

जो  धीर   रहे  गंभीर  रहे!

जीवन  रण  में तो वीर रहे!

निज हेतु भले कुछ शेष नही,

पर याचक हेतु  अमीर  रहे!

 

तन में बेशक  चंचलता  हो!

पर मन में बृहद अटलता हो!

हो लाख निराशा पर खुद  से,

विश्वास न जिसका गलता हो!

उस सत्व-सुंदरी ने ही, मन का हरण कर लिया है!

हाँ  वही  मेरी  प्रिया  है, हाँ  वही मेरी  प्रिया है!

 

कुछ राह कठिन जब आ जाए!

औ’  मेरा  मन  घबरा  जाए!

उसका  सहयोग  हो ऐसा  कि

हर मुश्किल  सरल  करा जाए!

 

सुख-दुःख कोई भी  रंग  रहे!

प्रतिक्षण-प्रतिपल वो संग रहे!

कैसे भी क्षण हो  जीवन  में,

बनकर  के  मेरा  अंग  रहे!

बसते हों जिसमे ये गुण, वो राधा वही सिया है!

औ’  वही  मेरी  प्रिया है, हाँ वही मेरी प्रिया है!

 

                   - पियुष द्विवेदी ‘भारत’

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Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on September 3, 2012 at 7:23am

Ravi Kumar Giri

शुक्रिया भाई.........

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on September 3, 2012 at 7:22am

Dr.Prachi Singh

बहुत-बहुत धन्यवाद प्राची जी..बस यूं ही थोड़ी बहुत कलम चला लेते हैं!

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on September 3, 2012 at 7:20am

Saurabh Pandey

शुक्रिया सौरभ जी.....

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on September 3, 2012 at 7:19am

Er. Ganesh Jee "Bagi"

धनयवाद जी......इस विशिष्टि की प्रेमिका मिलना बेशक कठिनतम है, पर हमेशा सौ फीसदी की आशा करनी चाहिए, क्योंकि तभी सत्तर-अस्सी फीसदी भी प्राप्त होगा ! पुनः धन्यवाद!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2012 at 10:59pm

रचना हेतु बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 1, 2012 at 6:40pm

सुख-दुःख कोई भी  रंग  रहे!

प्रतिक्षण-प्रतिपल वो संग रहे!

कैसे भी क्षण हो  जीवन  में,

बनकर  के  मेरा  अंग  रहे!

बसते हों जिसमे ये गुण, वो राधा वही सिया है!

औ’  वही  मेरी  प्रिया है, हाँ वही मेरी प्रिया है!

 
बहुत सुन्दर कल्पना, सुन्दर शब्द, सुन्दर प्रवाह, और सुन्दर भाव प्रिया... इस रचना हेतु आर्दिक बधाई पियूष द्विवेदी जी
Comment by Rash Bihari Ravi on September 1, 2012 at 3:43pm

जो  अत्याचार  विरोधी  हो!

अन्याय-राह   अवरोधी  हो!

पथभ्रष्ट जनों की खातिर तो,

सत्पथ-दायक  सम्बोधी  हो!

मन को धन्य धन्य कर दिया ,
आपको बनना हैं येसी की प्रिया ,
भाई मन को वैसा ही कर लो ,
आँखे बंद करके देखो पा लिया ,
खुबसूरत आपकी रचना
 

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 1, 2012 at 3:15pm

पियूष जी, जिस विशिष्टि की प्रेमिका चाहिए वो आज के समय में मिलना जरा कठिन है :-) थोडा बहुत निगोसियेसन कीजिये तो सम्भावना अत्यधिक प्रवलित है हा हा हा ...

बहुत ही प्यारी रचना, बहुत बहुत बधाई |

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on September 1, 2012 at 11:08am

धन्यवाद फूल सिंह जी........

Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 11:06am

पीयूष  जी प्रणाम,

आपका बहुत ही सुंदर रचना बधाई ................

फूल सिंह

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