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पाँच दोहे आँसू भरे

राजनीति के मंच पर, चढ़ गए आज दबंग
फूट फूट कर रो रहे, ध्वज के तीनों रंग

गधा जो देखन मैं चला, गधा न मिलया मोय
तब इक नेता ने कहा, मुझसा गधा न कोय

उजली खादी पहन के, करते काले काम
इनका बंटाधार अब, करदो मेरे राम

अभिव्यक्ति को घोंट कर, करो जेल में बन्द
लोकराज के नाम पर, करते जाओ गन्द

हाय  हमारे मुल्क का, फूटा हुआ नसीब
उसने ही विष दे दिया, समझा जिसे तबीब

-जय हिन्द ! 

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Comment by Er.vir parkash panchal on September 18, 2012 at 6:52pm

BAHOOT KHOOBSURAT

 

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 7:12pm

धन्यवाद भाई कुमार गौरव  जी................
आभारी हूँ

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 7:11pm

धन्यवाद लड़ी वाला  जी................
आभारी हूँ

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 7:08pm

आभारी हूँ आदरणीय  सौरभ जी.......
आपका मार्गदर्शन  मिलता रहा तो सब ठीक हो जायेगा ...........

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 13, 2012 at 1:44pm

वाह वाह ! क्या जबर्दस्त कहन है इन दोहों की !! विशेषकर

राजनीति के मंच पर, चढ़ गए आज दबंग
फूट फूट कर रो रहे, ध्वज के तीनों रंग 

मानों आपके अंदर का रचनाकार हृदय को काढ़ कर कह रहा हो.

प्रस्तुत दोहों के शिल्प पर सभी सुधीजनों ने सम्यक और सटीक बात कही है. सदस्यों की इस प्रासंगिकता पर मन मुग्ध है. आप भी अपने छंदों पर साहित्य मर्मज्ञों की सटीक सलाह पर संतुष्ट होगें, ऐसा पूर्ण विश्वास है, भाईजी. आप तदनुरूप प्रयास करेंगे, इस अपेक्षा के साथ सादर प्रणाम

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 11:38am

धन्यवाद योगी जी...........
सादर

Comment by Yogi Saraswat on September 13, 2012 at 11:14am

गधा जो देखन मैं चला, गधा न मिलया मोय
तब इक नेता ने कहा, मुझसा गधा न कोय

उजली खादी पहन के, करते काले काम
इनका बंटाधार अब, करदो मेरे राम

हहहाआआआआआ , मज़ा आया अलबेला साब ! आपकी ही रचना ऐसी हो सकती है मस्त ,बिंदास

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 13, 2012 at 10:51am

भाई श्री अलबेला जी, सुंदर व्यंगात्मक दोहों 

के लिए हार्दिक बधाई | देखे :-
राजनीती के मंच पर, देख काव्य के व्यंग 
नेताओं को लग रहा, एक दिन होंगे बंद //
 
अलबेला अब लिख रहा, व्यंग बड़े ही दबंग 
इनकी कलमे  तोड़कर , करो जेल में बंद //
जय हिंद 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 13, 2012 at 10:32am

जय हो अलबेला जी ! :-)))

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 13, 2012 at 10:25am

वाह-१०००००००००००००००००००...............सभी दोहे जबरदस्त हैं पर वो गधे वाला थोडा खास :)))))

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