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तीसरी दुनिया !!! -सतीश अग्निहोत्री

उस दुनिया के लोग ..

इस दुनिया में .

चंद हैं …..

हाँ यह तीसरी दुनिया …

मुझे पसंद हैं ..

हाँ मुझे पसंद हैं ..

वो तमाम उन्मुक्त

अनंत उड़न ..जिसका ..

न कोई सानी…

न कोई …पहचान ..

...भावनाओ का उफान ,

कल्पनाओ का जहाँ ..

जीवंत जीवन ..की चाह..

कभी न ले सके …

कोई जिसकी थाह …

वो आदि अनंत …

देख सके जिसे हर संत ..

वो अविरल प्रवाह ..

वो आनंद का जहाँ ..

वो स्पन्दंमय वाणी ..

जिसे कर सकू श्रवण ..

हर श्रंखला को ..

जिस तरह है बुना ..

नतमस्तक हूँ ..तेरे आगे

जो मुझे चुना …

रचनाकार -सतीश अग्निहोत्री

 

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Comment

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Comment by Rajeev Mishra on September 20, 2012 at 10:10pm

.भावनाओ का उफान ,

कल्पनाओ का जहाँ ..

जीवंत जीवन ..की चाह..

कभी न ले सके …

कोई जिसकी थाह …

वो आदि अनंत …सार्थक सोच कुछ दुनिया से अलग वाह बहुत खूब सतीश भाई जी  !

Comment by Satish Agnihotri on September 20, 2012 at 9:19pm

Again...Thanx a lot ....team Open books online  ..for considering  my second post ....

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