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शहर में शांति है

आज गाँधी जी के बुत के सामने फिर दंगे भड़क गए
धर्म के नाम पर लोग भिड़ गए मेरे शहर में
कितने ही मासूमों का खून बह निकला सड़कों पर
दिनभर से शहर में कर्फ्यू लगा है 

और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

हर रोज बलात्कार होते हैं मेरे शहर में
आबरू लूटती है चोराहों पर दोपहर में
नन्ही बच्चिओं को मार देते हैं जन्म से पहले
दर्द भरी चीखें निकलती हैं अँधेरी गलियों से 
और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

इंसानियत की नीलामी हो चुकी है मेरे शहर में
कातिल बेखौफ घूम रहे हैं बाजारों में 
छिना- झपटी तो हर चोराहे पर हो रही है
कानून - व्यवस्था का बाजा बज रहा है , 
और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

आज अख़बारों में घायल ख़बरों का अम्बार है 
कल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए है
भीड़ ने कई वाहन सड़कों पर जला दिए
सरकार विरोधी नारों का शोर है
और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

बे -ईमान , नकली नेताओं की भरमार है मेरे शहर में ,
घपले -घोटालों का सजा बाज़ार है ,
जनता बेकरार और लाचार है , 
व्यवस्था से परेशान लोगों का हाहाकार है ,
और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 30, 2012 at 12:55am

हर रोज बलात्कार होते हैं मेरे शहर में
आबरू लूटती है चोराहों पर दोपहर में
नन्ही बच्चिओं को मार देते हैं जन्म से पहले
दर्द भरी चीखें निकलती हैं अँधेरी गलियों से 
और प्रशासन कह रहा है शहर में शांति है |

सच में वीर प्रकाश जी दुर्दशा पसरी है प्रशासन की आँखें हैं ही कहाँ ?? ..बहुत सुन्दर सन्देश  ...सुन्दर रचना  ....

अपना स्नेह बनाये रखें 
भ्रमर ५ 
जय श्री राधे 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 29, 2012 at 8:16pm

यही तो हमारे देश का दुर्भाग्य है प्रशासन को दिखाई भी नहीं देता और सुनाई भी नहीं देता ये आक्रोश आपकी रचना में बखूबी झलक रहा है बहुत बढ़िया प्रस्तुति 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 29, 2012 at 7:26pm

अपनी सामाजिक संवेदनशीलता को यथार्थपरक सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आपनें इस रचना में. हार्दिक बधाई वीर प्रकाश जी 

Comment by Raman Jain on September 29, 2012 at 6:45pm

वाह , वीर प्रकाश जी , नपुंसक प्रशासन का क्या खूबसूरत चित्रण किया है , वाह, आप को बहुत बहुत बधाई ...

कृपया ध्यान दे...

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