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काश हर आह सर्द हो जाये,

काश हर आह सर्द हो जाये,
काश हमदर्द दर्द हो जाये .
अब दवा से मुझे क्या लेना ,
ला- दवा मेरा मर्ज़ हो जाये .
मौत री! ले ले मुझ को दामन में ,
दूर जीवन का कर्ज़ हो जाये .
आंसुओ सूख जाना भीतर ही ,
कहीं जग में न नशर हो जाये .
दीप जीर्वी
09815524600

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 25, 2010 at 12:02pm
बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने ज़िर्वी साहब.....आगे भी आपकी रचना और अमूल्य टिपण्णी की प्रतीक्षा रहेगी....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 21, 2010 at 7:20pm
मुआफी चाहूँगा, दरअसल अपने परिवार मे दीपक कुलवी साहब है ना, इसीलिये लिखा गया, मैं सुधार देता हूँ ....... जीर्वी साहिब अच्छा प्रयास है , आगे भी आपकी रचना और अन्य रचनाओं पर आपकी टिप्पणियों की प्रतीक्षा रहेगा |
Comment by DEEP ZIRVI on October 21, 2010 at 7:07pm
कुलवी nhi jnaab zeervi

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 21, 2010 at 9:58am
कुलवी साहिब अच्छा प्रयास है , आगे भी आपकी रचना और अन्य रचनाओं पर आपकी टिप्पणियों की प्रतीक्षा रहेगा |

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