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गाँव की विधवाओं को सरकार की ओर से सहायता राशि वितरित की जा रही थी. तभी एक नौजवान विधवा अपने हिस्से की धनराशि लेने मंच की ओर बढ़ी, जिसे देख नेता जी ने सरपंच के कान में धीरे कहा,
"ये लड़की कौन है ?"
"
ये नंदू लुहार की बहू है नेता जी."
"अरे भई इसको तो बाकियों से ज्यादा पैसा मिलना चाहिए था."
"वो क्यों नेता जी ?"
"अरे
मुखिया जी, ज़रा बॉडी तो देखिए ससुरी की."  

 

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:24pm

आपके उत्साह वर्धन का दिल से आभारी हूँ आद राजेश कुमारी जी।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:23pm

सादर धन्यवाद आद मार्कंड दवे जी।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:23pm

सादर धन्यवाद सीमा अग्रवाल जी।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:22pm

ह्रदय से धन्यवाद रेखा जोशी जी।  


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:22pm

आदरणीय सौरभ भाई जी, आपने रचना के मर्म को समझा और मेरा हौसला बढाया। आपको दिल से धन्यवाद कहता हूँ 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:21pm

भाई पियूष जी, दिल से आभार।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:20pm

अग्रज लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला जी, सादर धन्यवाद 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:19pm

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, रचना पसंद करने हेतु दिल से आभार।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:18pm

दिल से धन्याद भाई गणेश बागी जी।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 7, 2012 at 2:18pm

आदरणीय प्रदीप सिंह कुशवाहा जी लघु कथा पसंद करने के लिए दिल से आभार।

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