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अपनी करनी पार उतरनी , चिड़ी खेत चुग जाये ।

लालच डुबाया । सार छन्द ।
लोभ में कभी क्षोभ होत है , मन पीड़ा भर जाये ।
अपनी करनी पार उतरनी , चिड़ी खेत चुग जाये ।
देख हार फँस जाते लोभी , तब फिर मन पछताये ।
माया मोह काम ना आये , कहीं जान फँस जाये ।
देख आया मेल लंदन से , फौजी लालच आया ।
सौ करोड़ की लाटरी जान , सबका जी ललचाया ।
रिटायर कैपटन था पैसा , भेज अमल फरमाया ।
बैंक अकाउंट मेल भेजा , नाम गाँव मँगवाया ।
सर्विस टेक्स पहले भेजो , फिर पैसा आयेगा ।
बारह लाख नगद मँगवाया , रकम कौन लायेगा ।
जयपुर तीन शख्स पहुँच गये , ले बोले आयेगा ।
बाद में छै लाख ले बोले , आज भेजवायेगा ।
जयपुर ही जाने जाने में, बहुत खर्च होता था ।
पैसा मिलने की आशा में , सब ही खुश होता था
दस दिन तक पैसा ना आया , दो लाख ले बुलाया ।
फिर जयपुर पैसा ले पहुँचा , ले बोला बस आया ।
पेड़ की छाँव में जा बैठा , शाम तक नहीं आया ।
फोन पर फोन करता घर में , सुना जब नहीं आया ।
नाराज हो फोन पर पूछा , बोले अब घर जाओ ।
शरीर से हाथ धोना पड़े, पहले सम्भल जाओ ।
मीठी बाते तेज हो गयीं , सुन फौजी घबराया ।
पछताकर जब में बस पकड़ा , आह सबको सुनाया ।
पुलिस वाला लिख अब का करे , जान लालच डुबाया ।
वर्मा लालच से बचो जी , अपनी कवित सुनाया ।
श्याम नारायण वर्मा

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on November 28, 2012 at 7:55am

आजकल ऐसे 'मेल' और 'मेसेज' खूब आने लगे हैं! आपने अच्छी चेतावनी दी है! आदमी को अपनी मिहनत पर भरोसा नहीं रह गया है!

कृपया ध्यान दे...

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