For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हैं मोड़ बहुत सारे यूँ तो ...

हैं मोड़ बहुत सारे यूँ तो
पर दिशा मुझे तय करनी है,
पर मैं ही अकेला पथिक नहीं
आशा सच हो ये परखनी है

सुनता ही नहीं कोई मन की
अब खुद से खुद को सुनना है
संयम गर अपना साथी हो
फिर मंजिल पे ही मिलना है

कुछ ख्वाब नहीं सोने देते
हर पल बस करते हैं बातें
शुरुआत लक्छ्य की आज अभी
सूरज की बात ना तकनी है,

वो आता है हर सुबह यहाँ
उसके फेरे में जीवन है
फिर चाँद की बारी आती है
बस शब्द वही कुछ मंथन है

हर एक निभाता रस्मों को
हर एक का जीवन गति में है
बस फेंक तुरुप का तू पत्ता
अब बैठ पवन के घोड़े पर |

Views: 155

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 15, 2012 at 12:13pm

प्रिय सुमन जी बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना बधाई आपको |

Comment by SUMAN MISHRA on December 15, 2012 at 12:11pm

आभार केसरी जी

Comment by वीनस केसरी on December 15, 2012 at 2:43am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Comment by SUMAN MISHRA on December 14, 2012 at 10:41pm

shukriya prachi ji


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 14, 2012 at 6:52pm

प्रिय सुमन जी, आपकी कविता के भाव बहुत अच्छे हैं, पर प्रस्तुतिकरण  हेतु  शब्द चयन कुछ और वक़्त मांगता है, ताकि कविता में रस और प्रवाह निर्बाध हो सके.

सुन्दर भावों के लिए ह्रदय से बधाई 

Comment by SUMAN MISHRA on December 14, 2012 at 12:46pm

शुक्रिया बागी जी


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 14, 2012 at 12:44pm

अच्छी रचना सुमन जी, कही कही टंकण की त्रुटी परिलक्षित है, कृपया देख लेना चाहेंगी, बधाई इस अभिव्यक्ति पर |

Comment by SUMAN MISHRA on December 14, 2012 at 11:35am

abhaar ajai sir ji

Comment by Dr.Ajay Khare on December 14, 2012 at 11:29am

Suman ji aap ke lekhan me lay he bhav he keep it up

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,किन्नर पर रचना का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । शीर्षक में…"
15 minutes ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,लगता है ये ग़ज़ल आपने जल्द बाज़ी में कही है । 'मेरे कमरे में रात गए…"
19 minutes ago
Manoj kumar Ahsaas commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"बड़ी रदीफ़ क्या आपने अच्छी गजल पेश की है मित्र हार्दिक शुभकामनाएं"
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मिट्टी की तासीरें जिस को ज्ञात नहीं -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है अभी तक चौथे में लखन के क्या मायने हैं यह समझ में नहीं आया सादर अभिनंदन"
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas commented on khursheed khairadi's blog post एक ग़ज़ल ---नहीं आता
"एक बेहद शानदार गजल के लिए हृदय से दाद पेश करता हूं आदरणीय मित्र आदरणीय समर कबीर साहब गजल को देख ही…"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"मैं भी प्रयास करूंगा मित्र"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on विवेक ठाकुर "मन"'s blog post एक ग़ज़ल - ख़ुद को आज़माकर देखूँ
"प्रिय मित्र इस ग़ज़ल की बहर क्या है यह स्पष्ट करें ग़ज़ल की बहर गजल के ऊपर लिख दिया करें इससे गजल…"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसके पुरखे भटकाने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"अच्छी गजल हुई आदरणीय मित्र हार्दिक बधाई सतत प्रयत्नशील रहें सादर"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"प्रिय मित्र आपने इस ग़ज़ल पर इसके अरकान नहीं लिखे हैं कृपया ग्रुप में जो भी गजल डालें उस पर उस के…"
2 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण जी।"
6 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)
"आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी।"
6 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है, आपको ढेरों बधाई! ख़ास तौर पे मतला को कमाल है!"
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service