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छू दो तुम.. . / फिर
सुनो अनश्वर ! 

थिर निश्चल
निरुपाय शिथिल सी
बिना कर्मचारी की मिल सी
गति-आवृति से
अभिसिंचित कर
कोलाहल भर
हलचल हल्की.. .

अँकुरा दो
प्रति विन्दु देह का   
लिये तरंगें
अधर पटल पर.. . !

विन्दु-विन्दु जड़, विन्दु-विन्दु हिम
रिसूँ अबाधित 
आशा अप्रतिम.. .
झल्लाये-से चौराहे पर
किन्तु चाहना की गति
मद्धिम !

विह्वल ताप लिए
तुम ही / अब
रेशा-रेशा 
खींचो तन पर.. . !!

***************
--सौरभ
***************

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2013 at 3:24pm

आदरणीया सरिता जी,आपको रचना पसंद आयी यह मेरे लिए भी संतोष की बात है.

सादर

Comment by Sarita Bhatia on May 31, 2013 at 9:42am

आदरणीय सौरभ जी सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 6, 2013 at 3:07pm

आदरणीय दिगम्बर नासवाजी, जहाँ तक मुझे याद है, आप ग़ज़ल के अलावे मेरी कोई पहली रचना देख रहे हैं.

रचना को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 6, 2013 at 3:02pm

भाई गणेशजी, आपको यह रचना यथोचित प्रेरक लगी यह रचना को मिला सबसे उपयुक्त सम्मान है.

बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by दिगंबर नासवा on March 6, 2013 at 1:22pm

नव बिम्ब संजोए ... नए अंदाज़ से चाहत को जोड़ने का प्रयास ... 

सुन्दर नव गीत ...


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 26, 2012 at 9:04pm

इस नवगीत को पढ़ने के बाद नवगीत विधा मे रूचि अवश्य बढ़ गई है, सुन्दर शब्द समूह और खुबसूरत बिम्ब रचना को एक नवीन आयाम प्रदान करते हैं, बधाई आदरणीय सौरभ भईया |

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 26, 2012 at 6:00pm

जी सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 26, 2012 at 1:04pm

आदरणीय अशोकभाई, आपको रचना पसंद आयी इस हेतु हार्दिक धन्यवाद. नवगीत नयी विधा अवश्य है लेकिन बहुत ही प्रसिद्ध विधा है.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 25, 2012 at 7:09pm

आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, नवगीत कविता सामान ही अभिव्यक्ति का सुन्दर रुप है. कुछ कुछ समझ सका हूँ देखकर जो की आपने आदरणीय राजेश झा जी को समझाने का प्रयास किया है. सादर हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 23, 2012 at 12:09am

आदरणीय विजय साहब, आपको मेरा प्रयास भला लगा यह आपकी गुण-ग्राहकता है. आपका सादर आभार .

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