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तुम्हारे साथ ....

ओ तरुणी
मेरे आंसू
तेरे दुख
कम नहीं कर पाएँगे
मेरी संवेदनाएँ
तेरे जख्म नहीं भर पायेंगे 
तार -तार हैं सपने तेरे
रोम रोम में जहर भर गए
कुंठित होगा मन का कोना
घृणा के ज्वार पे तुम सवार
बदले की आग में भी जलोगी
ना कुछ करने की विवशता

आत्महत्या के लिए प्रेरित करेगी

ओ मेरी अनजान सखी 
एक विनती
मेरी बस सुन लो
आसुंओ की काल कोठरी में
जीवन मत खोना
गमो की पोटली मत ढोना
सच मानो
ईश्वर ने तुम्हें गर
नरक दिया है तो
स्वर्ग का रास्ता भी
कंही खुला रखा होगा
बस
हिम्मत मत हारना
तप कर तुझे

सोना बनना है


ओ दामिनी
कल तक
जो भी सपने थे तेरे
भूल उसे अब
आगे बढ़ना होगा
लाचार तुम नहीं
व्यवस्था पंगु है
पहचान अपनी शक्ति को
तुझे ध्रुव तारा सा चमकना होगा
पोंछ कर सारी तस्वीर
दे अपनी तरुणाई को
नया आधार
चुन नए पथ को
रख मजबूती से
अपने कदमो को 
नाप नया आकाश 
तुम जानो या ना जानो
मानो या ना मानो
हमारी दुआएं
है तुम्हारे आस पास 
तुम्हारे  साथ  /

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 23, 2012 at 8:10pm

ओ मेरी अनजान सखी 
एक विनती
मेरी बस सुन लो
आसुंओ की काल कोठरी में
जीवन मत खोना
गमो की पोटली मत ढोना
सच मानो
ईश्वर ने तुम्हें गर
नरक दिया है तो
स्वर्ग का रास्ता भी
कंही खुला रखा होगा

निश्चित  तौर पर ऐसा हि हो. 

आपकी संवेदना को नमन. 

बधाई 

स्नेही महिमा जी, सादर 

Comment by MAHIMA SHREE on December 23, 2012 at 7:45pm

आदरणीया सीमा जी .. कहते है जब दवा ना काम करे तो बस दुआ काम करती है / हम सब दुखी है और विवश भी ..पर हमारी दुआये जब एक हो जायेगी तो मुझे विश्वास है .. परिवर्तन होगा विचारों में / समाज में / और सभी दामिनियो के जीवन में भी /

Comment by seema agrawal on December 23, 2012 at 7:36pm

प्रिय महिमा श्री 

दिल से लिखी गयी  हिम्मत बंधाती ये पंक्तियाँ बहुत सी दामिनियों तक दुआ बन कर पहुंचे यही कामना करती हूँ मैं भी आपके सुर में सुर मिला कर यही कहना चाहूंगी 

पोंछ कर सारी तस्वीर
दे अपनी तरुणाई को
नया आधार
चुन नए पथ को
रख मजबूती से
अपने कदमो को 
नाप नया आकाश 
तुम जानो या ना जानो
मानो या ना मानो
हमारी दुआएं
है तुम्हारे आस पास 
तुम्हारे  साथ ................

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