शब्दों के भण्डार से, भरके मीठे बोल,
बेंचो घर-घर प्रेम से, दिल का ताला खोल,
नैनो से नैना मिले, बसे नयन में आप,
मधुर-मधुर एहसास का, छोड़ गए हो छाप,
मुख में ऐसे घुल गया, जैसे मीठा पान,
भाता सबको खूब है, दोहों का मिष्ठान,
मन में लागी है लगन, सीखन की है चाह,
धीरे-धीरे दिख रही, मुझको सच्ची राह,
बेटा जुग-जुग तुम जियो, जननी दे आशीष,
माता की पूजा करो, चरणों में रख शीश,
सुख-दुख करता ना दिखा, जात पात का भेद,
मानव से नफरत करो, नहीं सिखाता वेद.
("मौलिक व अप्रकाशित")
Comment
धन्यवाद अजय सर
dohe badia he badhai
आदरणीय लक्ष्मण सर आपका यह बहुत खूब सुखद है मेरे लिए. सादर
उत्तम रचना हार्दिक बधाई मित्र !!!!!!!!
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