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एक मीठी तकरार ,
एक दुसरे पर अधिकार!
यही तो कहलाता है ,
एक संयुक्त परिवार !!
********************
रोने से क्या होता है ,
यहाँ लड़ना पड़ता है !
कर्महीन और कायर ही ,
उत्पीडन झेला करता है !
***********************
रोते को हँसा कर देखो,
भूखे को खिलाकर देखो !
कितनी आत्म शांति इसमे ,
एक बार आज़माकर देखो !
************************** 
पचपन में भी लार टपकाते ,
गन्दी नज़रों से सबको निहारते !
छींटदार चरित्र वाले ही अक्सर ,
चरित्र निर्माण का भाषण सुनाते !
********************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 375

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on February 4, 2013 at 8:41pm

laxman sir हार्दिक आभार आपको रचना पसंद आयी!

Comment by ram shiromani pathak on February 4, 2013 at 8:40pm

prachi mam हार्दिक आभार आपको रचना पसंद आयी!

Comment by ram shiromani pathak on February 4, 2013 at 8:39pm

गणेश सर हार्दिक आभार आपको रचना पसंद आयी! मेरी गलतियों पर आप लोग कमेन्ट नहीं करेंगे तो मुझे कैसे मालून पड़ेगा की मै किस दिशा में जा रहा हूँ !आप श्रेष्ठ है !मै नया नया हूँ , सर अतः मेरी किसी भी गलती को क्षमा करते हुए मेरा मार्गदर्शन करने की कृपा करे ...............सादर  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 4, 2013 at 8:17pm

//पचपन में भी लार टपकाते ,
गन्दी नज़रों से सबको निहारते !
छींटदार चरित्र वाले ही अक्सर ,
चरित्र निर्माण का भाषण सुनाते !//
बचपन में पचपन की बात, बहुत खूब , सुन्दर ख्याल, बधाई स्वीकार करें |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 4, 2013 at 5:03pm

प्रिय राम शिरोमणि जी, सुन्दर भावों को व्यक्त किया है आपने, बधाई स्वीकारे.

आपके पास बहुत सारे सुन्दर कथ्य हैं, उन्हें विधाजनित शिल्प दे कर देखें अभिव्यक्ति का रूप ही बदल जाएगा.

शुभ कामनाएं 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 4, 2013 at 2:21pm

एक मीठी तकरार ,एक दुसरे पर अधिकार!

यही तो कहलाता है,एक संयुक्त परिवार !!-बहुत सुन्दर रचना बधाई श्री राज शिरोमणि पाठक जी 

दो मीठे शब्द बोल कर देखो 

एक दुसरे के भार को बांटने के देता है अधिकार 

उसे कहते है संयुक्त परिवार -लक्ष्मण लडीवाला 

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