For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ग़ज़ल "

आज बेमौत मर रहा होगा,
जो सवालों से डर रहा होगा ।

बाग़ की झुरमुटों में हलचल है,
नव युगल प्यार कर रहा होगा ।

अपने होने लगे हैं बेगाने,
कोई तो कान भर रहा होगा ।

खंडहर आज तक सलामत है 
नींव कहती है घर रहा होगा 

गुल छुपाने का फायदा क्या है,
बनके खुशबू बिखर रहा होगा ।

रौशनी हर कदम पे साथ रही,
"दीप" सा हमसफ़र रहा होगा ।

  • संदीप पटेल "दीप"

Views: 1225

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 18, 2013 at 10:52pm

पुराने पड़ गये डर, फेंक दो तुम भी

ये कचरा आज बाहर फेंक दो तुम भी


यहाँ मासूम सपने जी नहीं पाते

इन्हें कुंकुम लगा कर फेंक दो तुम भी

संदीप तोमर जी क्या आप अधोलिखित नियम उपर्युक्त लिखी दुष्यन्त जी की गजल को उदाहरण बनाकर समझा सकते हैं ??

Comment by sandeep tomar on February 18, 2013 at 10:41pm

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी ji आप खुद ही कह रहे है अधकचरी जानकारी। फिर क्या कहूँ 

 इतना जरुर  है की मुकम्मल गजल के लिए अआप दुष्यंत त्यागी को जरुर पढ़ें 
हर तुकबंदी गजल नहीं होती तुकबंदी मई भी कर लेता हूँ पर मैं गजलकह पाता  हूँ ऐसा नहीं है।
 मुझे गजल कहनी नहीं आती पर पढनी जरुर आती है 
वैस ईटीओ आज कल विन मात्राओं का लिहाज किये शेर  दोहे चोपाई सब लिखी जा रही हैं 
Comment by sandeep tomar on February 18, 2013 at 10:35pm

गजल लिखने में कुछ तरीके इस्तेमाल होते है जैसे अगर कोई शेर लघु मात्र से शुरू किया तो अगला शेर भी उसी मात्र से शुरू हो तो गजल सही है 

अगर गजल  के शेर का पहला शब्द तीन अक्षर का है ओ हर शेर इअसे ही लिखे। 
 हर शेर की लम्बाई बराबर हो अगर शेर का पहला शब्द लघु दीर्ध फिर लघु है तो हर बार ये ही नियम लागु रखें 
इसी तरह और भी बहुत सी बातें है जो लिखने से साथ साथ निखार प् आएँगी 
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 10:14pm

आदरणीय भाई किशन जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 10:14pm

आदरणीया वेदिका जी सादर

आपकी सराहना और शुभकामनाएं सर आँखों

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 10:12pm

आदरणीय भाई विन्ध्येश्वरी जी सादर

इस हौसलाफजाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया वन्धुवर

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by वेदिका on February 18, 2013 at 10:03pm

मुझे तो अच्छी लगी गजल ... 

शुभकामनायें !

Comment by वेदिका on February 18, 2013 at 9:59pm

बाग़ की झुरमुटों में हलचल है,
नव युगल प्यार कर रहा होगा ।

शानदार शेर ...! शुभकामनायें !! 

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 18, 2013 at 9:59pm

भाई संदीप तोमर जी!मेरी अधकचरी जानकारी के मुताबिक संदीप भाई की गजल एक मुकमम्ल गजल है।इसमें कफिया है-"अर",रदीफ है-"रहा होगा"।
आपको इसमें कफिया एवं रदीफ क्यों नहीं मिल रहा है या तो आप जाने या ईश्वर।

फिल्हाल संदीप कुमार पटेल भाई जी को हार्दिक बधाई।इन पंक्तियों के लिये विशेष रूप से-
//अपने होने लगे हैं बेगाने,
कोई तो कान भर रहा होगा ।

खँडहर वो ही हुआ करता है,
जो कभी एक घर रहा होगा ।

गुल छुपाने का फायदा क्या है,
बनके खुशबू बिखर रहा होगा ।//

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 9:49pm

आदरणीय संपादक महोदय जी आपका बहुत बहुत आभार

यदि कुछ गलती के बारे में पता चले तो अवश्य बताइयेगा सर जी ताकि हम यथा उचित सुधार कर सकें

ये स्नेह बनाये रखिये

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service