मौलिक / अप्रकाशित
दीमक बिच्छू साँप से, पाला पड़ता जाय ।
पाला इस गणतंत्र ने, पाला आम नशाय ।
पाला आम नशाय, पालता ख़ास सँपोला ।
भानुमती ने पुन:, पिटारा कुनबा खोला ।
पालागन सरकार, बनाओ रविकर अहमक ।
निगलो भारत देश, मौज में रानी दीमक ।।
पाला पढ़ना= मुहावरा
पाला= पालना / जल की बूंदे जो सर्दियों में (आम ) फसल बर्बाद कर देती है /
पालागन = प्रणाम
Comment
आभार आदरणीय-
आदरणीय इस रचना के लिए मेरी बधाई और सादर प्रणाम!
आदरणीय रविकर जी, यह सही है कि पुनः की मात्रा १+२ के कारण ३ ही होगी लेकिन यह त्रिकल कुण्डलिया के रोला वाले भाग में विषम चरणांत है अतः उसका विन्यास २+१ की तरह होना चाहिये, जैसा कि आपने इसी कुण्डलिया के रोला वाले भाग के अन्य विषम चरणांतों को लिया है. जैसे, नशाय, सरकार, देश. ऐसा ही व्यवहार सम्मत है
वस्तुतः, रोला के लिए शब्द विन्यास, आदरणीय, यों कहते हैं -
विषम चरण - ४+४+३ या, ३+३+२+३
सम चरण - ३+२+४+४ या, ३+२+३+३+२
इसके साथ ही, व्यवहार सम्मत यह भी है कि विषम का चरणांत गुरु लघु या लघु लघु लघु हो.
तथा, इसी क्रम में सम चरणों का अंत गुरु गुरु, लघु लघु गुरु या, गुरु लघु लघु या लघु लघु लघु लघु हो.
आदरणीय, हमने इसी व्यवहार सम्मत प्रचलन को पुनः शब्द के क्रम में रेखांकित किया है.
सादर
आभार आदरणीय जवाहर लाल जी ||
आभार आदरणीय सौरभ सर -
कुछ सुझाव आदरणीय-
पुन: की कुल मात्रा तीन मानी है-
मार्गदर्शन करने का कष्ट करें-
सादर
आदरणीय रविकर भाई, दीमक रानी मौज मनानी.. . :-))
अच्छा व्यंग्य वह भी यमक और श्लेष के जोर पर ! बहुत-बहुत बधाई.. .
एक बात : भानुमती ने पुन: के पुनः को देख लीजिये. न पर विसर्ग होने से ’न’ की मात्रा २ या ’न’ गुरु का हो गया है.
सादर
सटीक और समयानुकूल
आभार आप सभी महानुभावों का -
सादर
क्या बात है !!! आज के हालात का सटीक वर्णन ।
हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय रविकर जी |
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